गाय-भैंस पालते हैं तो पूरी जनवरी जरूर करें ये 20 काम

कम नहीं होगा दूध

एनिमल एक्सपर्ट के मुताबिक सर्दी के मौसम में गाय-भैंस के बाड़े में बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है. और खास बात ये कि दिसम्बर-जनवरी के महीने में ही पशु हीट में ज्या‍दा आता है.

वहीं गर्मी में गाभिन कराए गए पशु इस दौरान बच्चा देने वाले होते हैं. पशुओं की सबसे ज्यादा बिक्री भी फरवरी तक खूब होती है.

किसी भी मौसम में पशुओं को बीमारियों से बचाना बहुत जरूरी हो जाता है. क्योंकि बीमारी के चलते पशुओं की होने वाली मौत पशुपालक को तगड़ा झटका देती है.

क्योंकि अगर ठंड की बात करें तो इस मौसम में बीमार होने के चलते किसी भैंस की मौत होती है तो पशुपालक को सीधे-सीधे 80 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक का नुकसान होता है.

इसीलिए एनिमल एक्सपर्ट इस मौसम में पशुओं के बाड़े में खास तरीके से देखभाल करने पर जोर देते हैं. इसके पीछे एक वजह ये भी है कि दिसम्बर-जनवरी के दौरान पशु हीट में भी आते हैं और बच्चा भी देते हैं.

लेकिन सर्दियों के दौरान पशुपालक पशुओं की देखभाल से जुड़े कुछ ऐहतियाती कदम उठाकर परेशानी और आर्थिक नुकसान से बच सकते हैं.

और इस काम में पशुपालकों की मदद के लिए सरकार और संबंधित विभाग की ओर से एडवाइजरी भी जारी की जाती है.

एनिमल एक्सपर्ट की मानें तो अक्टूबर से जनवरी-फरवरी के बीच ही पशुओं की खरीद-फरोख्त भी खूब होती है. इसलिए हर लिहाज से इस मौसम में पशुओं की ज्यादा देखभाल बहुत जरूरी है.

क्योंकि इस दौरान अगर पशु बीमार होते हैं तो उनका दूध कम हो जाता है. वहीं पशुपालक को इसका खामियाजा आर्थिक नुकसान के रूप में उठाना पड़ता है.

 

सर्दियों में ऐसे करें पशुओं की देखभाल

  • दिन और रात के मौसम का अपडेट लेते रहें. 
  • पशुओं को शीत लहर से बचाने के सभी इंतजाम कर लें. 
  • रात के वक्त बाड़े को तिरपाल से अच्छी तरह ढककर रखें. 
  • पशुओं के नीचे फर्श पर पुआल आदि बिछा दें. 
  • बाड़े में रोशनी रखें और जगह को गर्म रखने का इंतजाम कर लें. 
  • पशुओं को सूखी जगह पर ही बांधे. 
  • पशुओं को पेट के कीड़े मारने वाली दवा खिलाने के साथ ही जरूरी टीके लगवा दें. 
  • मक्खी-मच्छर से बचाने के लिए बाड़े में लैमनग्रास और नारगुण्डी को टांग दें. 
  • मक्खी-मच्छर से बचाने के लिए नीम तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं.
  • पशुओं को मोटे कपड़े और बोरी आदि से ढककर रखें. 
  • पशुओं को गर्म रखने के लिए खली और गुड़ खिलाएं. 
  • पशुओं को दिन में तीन से चार बार हल्का गर्म पानी पिलाएं. 
  • बीमार, कमजोर और गाभिन पशु का खास ख्याल रखें. 
  • मृत पशु के शव का निस्तारण आबादी और तालाब आदि से दूर करें. 
  • आग लगने में सहायक वस्तुओं को पशु के बाड़े से दूर रखें. 
  • पशु के नए बाड़े का निर्माण मौसम के हिसाब से ही कराएं.

 

पशु पालने वाले सर्दियों में न करें ये काम

  • सर्दियों के मौसम में पशुओं को खुला ना छोड़ें.
  • सर्दी के मौसम में पशु मेलों का आयोजन नहीं करना चाहिए.
  • ठंडा चारा और पानी पशुओं को नहीं देना चाहिए.
  • नमी और धुंए वाली जगह पर पशुओं को नहीं रखना चाहिए.
  • नमी और धुंए से निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है.
  • बीमार होने पर पशु को सिर्फ डॉक्टर को ही दिखाएं.

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