नए सीड एक्ट में किए गए सख्त प्रावधान
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि नए सीड एक्ट 2026 के तहत हर बीज पर QR कोड, बीज कंपनियों का अनिवार्य पंजीकरण और नकली बीज बेचने वालों पर 30 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
देश के किसानों को जल्द ही घटिया और नकली बीजों से छुटकारा मिलेगा। इसके लिए सरकार नया क़ानून लाने जा रही है।
16 जनवरी के दिन केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया से बात करते हुए नए सीड एक्ट (Seed Act 2026) की विशेषताओं और उसके किसानों पर होने वाले प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसानों की सुरक्षा, बीज की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाला ऐतिहासिक कदम है।
किसानों को मिलेगी बीज की पूरी जानकारी
मीडिया के सवालों का जवाब में केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि अब देश में बीज की ट्रेसिबिलिटी (Traceability) की व्यवस्था स्थापित की जाएगी।
उन्होंने बताया, हर बीज पर QR कोड होगा, जिसे स्कैन करते ही किसान यह जान पाएंगे कि बीज कहां से आया, किसने बेचा और किस डीलर ने दिया है।
इससे घटिया या नकली बीज न केवल रोके जा सकेंगे बल्कि यदि वे बाजार में आएंगे भी तो जिम्मेदार व्यक्ति पर शीघ्र कार्रवाई संभव होगी।
उन्होंने कहा कि ट्रेसिबिलिटी (Traceability) लागू होने से नक़ली और खराब बीज बाजार में आयेंगे ही नहीं और आयेंगे तो तुरंत पकड़े जाएँगे।
इससे किसानों को भ्रमित करने वाली कंपनियों और डीलरों की मनमानी पर लगाम लगेगी।
बीज कंपनियों का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि अब हर सीड कंपनी का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा, जिससे यह साफ रहेगा कि कौन सी कंपनी अधिकृत है।
उन्होंने कहा पंजीकृत कंपनियों की जानकारी उपलब्ध रहेगी और कोई भी अनधिकृत विक्रेता बीज नहीं बेच पाएगा।
इससे बाजार में फर्जी कंपनियाँ खत्म होंगी और किसानों को सही स्रोत का बीज मिलेगा।
उन्होंने इस भ्रम को दूर किया कि नया कानून किसानों के परंपरागत बीजों पर रोक लगाएगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसान अपने बीज बो सकते हैं, दूसरे किसान को बीज दे सकते हैं। स्थानीय स्तर पर जो परंपरागत बीज विनिमय की परंपरा है, वो जारी रहेगी।
उन्होंने उदाहरण दिया कि ग्रामीण इलाकों में बोनी के समय किसान आपस में बीज लेते–देते हैं और बाद में उसे सवा गुना वापिस कर देते हैं, यह पारंपरिक प्रणाली आगे भी जारी रहेगी।
नकली बीज बेचने पर होगा 30 लाख रुपए का जुर्माना
कृषि मंत्री ने कहा कि बीजों की गुणवत्ता पर अब किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अभी तक नक़ली बीज पर 500 रुपये तक का जुर्माना था, अब प्रस्ताव है कि 30 लाख रुपये तक जुर्माना हो और अगर कोई जानबूझकर अपराध करता है तो सजा का भी प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि सब कंपनियां खराब नहीं हैं, लेकिन जो किसान को धोखा देंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
विदेश से आने वाले बीजों की होगी जांच
केंद्रीय कृषि मंत्री ने साफ किया कि सीड एक्ट में तीनों स्तर पर प्रावधान किए गए हैं- सार्वजनिक क्षेत्र (ICAR, कृषि विश्वविद्यालय, KVKs), देसी कंपनियां जो उच्च गुणवत्ता के बीज बनाती हैं और विदेशों से जो बीज आते हैं।
उन्होंने कहा कि विदेशों से आने वाले बीजों की पूरी तरह जाँच की जाएगी और मूल्यांकन के बाद ही स्वीकृत किए जाएँगे।
साथ ही हमारे सार्वजनिक और देसी निजी क्षेत्र को मजबूत बनाया जाएगा ताकि किसानों तक अच्छे बीज पहुंचें।
1966 का पुराना कानून होगा आधुनिक
कृषि मंत्री ने कहा कि 1966 का सीड एक्ट पुराने समय का था जब न तकनीक थी न डेटा।
अब हम एक आधुनिक कानून ला रहे हैं, जो ट्रेसिबिलिटी, डिजिटल रिकॉर्ड और जवाबदेही के सिद्धांत पर आधारित है ताकि भविष्य में कोई भी किसान ठगा न जाए।
इस सवाल पर कि कुछ लोगों ने यह आशंका जताई थी कि नया कानून राज्यों के अधिकार घटा देगा, इस पर कृषि मंत्री ने साफ कहा, कृषि राज्य का विषय है।
राज्य सरकारों के अधिकार वैसे ही बने रहेंगे। केंद्र केवल समन्वय करेगा और राज्यों के सहयोग से यह कानून लागू होगा।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि हर किसान को गुणवत्तापूर्ण बीज मिले। अच्छी कंपनियों को प्रोत्साहन और गलत करने वालों पर कड़ी कार्रवाई, यही इस कानून का सार है।
उन्होंने कहा कि सीड एक्ट 2026 के माध्यम से सरकार हर किसान को सुरक्षित, भरोसेमंद और उत्पादक बीज उपलब्ध कराने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठा रही है।
