गुड़ का स्वाद और मिठास ऐसी कि किसान के घर खिंचे चले आ रहे व्यापारी

सिवनीः गन्ने की खेती, देशी विधि से उत्पादन

सिवनी. सिमरिया ग्राम (हथनापुर) निवासी 62 वर्षीय किसान शिवराम सनोडिया गन्ने की खेती के साथ गुड़ बनाकर लाखों रुपए कमा रहे हैं।

उनके घर के पास इन दिनों कोल्हू से निकलती भाप, गन्ने के रस की सुगंध और धूप में चमकता गुड़ देखा जा सकता है। इस गुड़ की खूब मांग है।

किसान शिवराम के अनुसार वह प्रतिवर्ष 12 एकड़ में गन्ने की खेती करते हैं। इसके बाद एकल कढ़ाई में रस को धीमी आंच पर पकाकर एकदम शुद्ध, पौष्टिक और केमिकल रहित गुड़ बनाते हैं।

शुद्धता. और सफाई को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने बताया कि स्टील की कढ़ाही में गुड़ बनाया जाता है। संक्रमण फैलने का डर नहीं रहता।

पारंपरिक तरीके से बनने वाले गुड़ का रंग सुनहरा होता है। इसमें पोषक तत्व (आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस) होते हैं।

 

एक बार बोवनी, 5 वर्ष तक कटाई

किसान ने बताया कि गन्ने की खेती में एक बार बोवनी के बाद चार-पांच वर्ष तक कटाई कर सकते हैं। शुरुआत में 50 हजार रुपए प्रति एकड़ लागत आती है। इसके बाद हर वर्ष 15-20 हजार रुपए खर्च होते हैं।

गन्ने का उत्पादन उनके परिवार में पहले से ही होता आया है, लेकिन इसे लाभ का जरिया कैसे बनाया जाए इसके लिए कुछ अलग सोचा।

1978 से वह गन्ने का उत्पादन करने के साथ ही घर पर मशीन लगाकर गुड़ भी बनाने लगे। किसान शिवराम सनोडिया को राज्य और ब्लॉक स्तर पर कई पुरस्कार मिल चुके हैं।

 

हर साल बना लेते हैं 500 क्विंटल गुड़

समय के साथ गुड़ बनाने की विधि में शिवराम ने परिवर्तन किया। 2024 में 28 लाख रुपए की लागत से 30 एचपी की मशीन खरीदी।

स्टेनलेस स्टील की कढ़ाई में गुड़ बना रहे हैं। इसकी मांग छिंदवाड़ा, बालाघाट सहित अन्य जिलों में है।

गुड़ को पहले मंडी ले जाना पड़ता था, लेकिन अब व्यापारी घर से ही गुड़ खरीद रहे हैं। प्रतिवर्ष 500 क्विंटल गुड बना लेते है।

खर्च निकालने के बाद 12-13 लाख रुपए की बचत हो रही है। गुड़ बनाने की प्रक्रिया दिसंबर से फरवरी तक चलती है। उन्होंने 30 लोगों को’ रोजगार भी दे रखा है।