नवाचार : सरसों के खेत में मधुमक्खी पालन, मुनाफा और पर्यावरण सुरक्षित

सुधरती है बीज की गुणवत्ता

किसान भाई एक ही खेत से सरसों और शहद दोनों का लाभ उठा सकते हैं। सरसों की खेती के साथ मधुमक्खी पालन को अपनाकर अपनी आमदनी को दुगना कर सकते हैं।

यह न सिर्फ फसल की पैदावार बढ़ता है बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखता है। सरसों एक परागण आधारित फसल है और इस प्रक्रिया में मधुमक्खियां आम भूमिका निभाती है।

जब मधुमक्खियां फूलों से पराग इकट्ठा करती है, तो वह पराग को एक फूल से दूसरे फूल तक ले जाती है, इससे परागण बेहतर होता है, उपज बढ़ती है।

 

फसल और मधुमक्खी की साझेदारी

सरसों एक पराग कण आधारित फसल है। यानी इसके फूलों में फल बनने के लिए परागण की जरूरत होती है। मधुमक्खियां इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती हैं।

जब मधुमक्खियां फूलों से पराग इकट्ठा करती हैं, तो वे पराग को एक फूल से दूसरे फूल तक ले जाती हैं, जिससे फसल का परागण अच्छे से होता है।

इससे पौधों में ज्यादा फलियां बनती हैं और दाने बेहतर तरीके से भरते हैं। इससे उपज बढती है जिससे किसान को अधिक आर्थिक लाभ होता है।

 

खर्च भी अधिक नहीं

मधुमक्खी पालन करने में बहुत ज्यादा खर्च नहीं आता। खेत में मधुमक्खी बॉक्स रखना सुविधा जनक होता है।

मधुमक्खियां खेत में जैव विविधता बनाए रखती हैं और पर्यावरण को भी सुरक्षित रखती हैं। यह एक प्राकृतिक तरीका है जिससे खेती को और लाभकारी बनाया जा सकता है।

 

बढ़ता है उत्पादन

मधुमक्खी से न सिर्फ उत्पादन में इजाफा होता है, बल्कि यह खेती को रसायनमुक्त और अधिक टिकाऊ भी बनाता है।

मधुमक्खियों की मदद से परागण बेहतर होता है, जिससे बीज की गुणवत्ता भी सुधरती है और खेत की उपज भी ज्यादा होती है।

 

फायदा दोगुना

मधुमक्खियों के साथ सरसों की खेती करने का सबसे बड़ा फायदा यह है. कि एक ही खेत से किसान को दो उत्पाद मिलते हैं, सरसों और शुद्ध शहद।

जहां एक ओर फसल की पैदावार 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ती है। दूसरी ओर मधुमक्खियों से कई किलो शहद भी निकलता है।