रबी की फसलों (गेहूं कटाई के बाद खाली पड़े खेतों में ‘जायद मूंग’ की खेती किसानों के लिए ‘बोनस’ साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मात्र 60 से 70 दिनों में पकने वाली यह फसल न केवल अतिरिक्त आय देती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ाती है।
खेत की तैयारी और उन्नत किस्में
जायद मूंग की फसल के लिए तापमान 25 से 40 डिग्री सेल्सियस तक उपयुक्त माना जाता है। वहीं, मिट्टी हल्की से मध्यम दोमट, जल निकासी वाली हो। मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
- एसएमएल 668,
- आइपीएम 02-3 (श्रेया),
- आइपीएम 410-3 (विराट),
- आरएमजी-975 सहित अन्य उन्नत किस्में हैं।
जायद मूंग की पकाव की अवधि 60 से 70 दिन होती है। खेत की जुताई करके और अंतिम जुताई में पाटा लगाकर खेत समतल कर लें।
जिससे ड्रिप/स्प्रिंकलर की सहायता से सिंचाई की जा सके। इसके अलावा कृषि विशेषज्ञों की सलाह लें।
बुवाई
1 मार्च से 15 अप्रैल तक कर सकते हैं। प्रति हेक्टेयर 12 से 15 किलो बीज की जरूरत होती है।
कतार से कतार की दूरी 30 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी तक रखें। रोगों से बचाव के लिए विशेषज्ञों की सलाह लें।
