23 मार्च से मिलेगा भावांतर का लाभ
मध्य प्रदेश सरकार ने सरसों किसानों को MSP सुनिश्चित करने के लिए भावांतर योजना की घोषणा की है।
23 मार्च से 30 मई तक मंडियों में सरसों बेचने वाले किसानों को भावांतर योजना का लाभ दिया जाएगा।
सरसों उत्पादक किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने और बाजार की अनिश्चितताओं से बचाने के लिए सरकार ने भावांतर भुगतान योजना के तहत महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि बाजार में सरसों की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे गिरती हैं, तो सरकार उस अंतर की भरपाई सीधे किसान के खाते में करे।
इस योजना के तहत किसान 23 मार्च से 30 मई 2026 तक अधिसूचित मंडियों में अपनी उपज बेचकर मूल्य अंतर की भरपाई प्राप्त कर सकेंगे।
इसके लिए किसानों का पंजीयन 26 फरवरी से 20 मार्च तक ई-उपार्जन पोर्टल पर किया जा चुका है।
योजना का लाभ केवल राज्य की अधिसूचित मंडियों में ही मान्य होगा।
कैसे मिलेगा किसानों को भावांतर का लाभ?
योजना के तहत किसानों को उनके पंजीकृत रकबे और औसत उत्पादकता के आधार पर पात्रता तय की जाएगी।
केंद्र सरकार के प्रावधानों के अनुसार, राज्य के कुल उत्पादन के 40 प्रतिशत तक और MSP में 15 प्रतिशत तक की कमी पर राशि प्रदान की जाएगी।
- MSP से ऊपर बिक्री: यदि किसान की सरसों MSP के बराबर या उससे अधिक दाम पर बिकती है, तो कोई सहायता राशि नहीं दी जाएगी।
- औसत थोक मूल्य से अधिक: यदि बिक्री मूल्य MSP से कम है लेकिन घोषित औसत थोक मूल्य से अधिक है, तो MSP और वास्तविक विक्रय मूल्य के बीच का अंतर दिया जाएगा।
- औसत थोक मूल्य से कम: यदि बिक्री मूल्य औसत थोक मूल्य से भी नीचे चला जाता है, तो भी किसान को केवल MSP और घोषित औसत थोक मूल्य के अंतर की राशि ही मिलेगी।
मॉडल रेट से तय होगा भुगतान
सरकार ने मॉडल रेट तय करने की व्यवस्था भी लागू की है। 23 मार्च से शुरू होने वाले पहले 14 दिनों के लिए राज्य की सभी मंडियों के औसत बिक्री मूल्य के आधार पर एक समान मॉडल रेट लागू रहेगा।
इसके बाद प्रतिदिन पिछले 14 दिनों के औसत मूल्य के आधार पर नया मॉडल रेट तय किया जाएगा, जिसे E-Mandi पोर्टल पर रोजाना अपडेट किया जाएगा।
यदि किसी किसान ने 1 मार्च से 22 मार्च के बीच सरसों की बिक्री कर दी है, तो उस मात्रा को उसकी कुल पात्रता से घटा दिया जाएगा और शेष मात्रा पर ही भावांतर का लाभ मिलेगा।
भुगतान की प्रक्रिया
किसानों को भुगतान दो चरणों में प्राप्त होगा :
- व्यापारी द्वारा भुगतान: मंडी में खुली नीलामी में प्राप्त राशि संबंधित व्यापारी द्वारा 01 दिन के भीतर दी जाएगी।
- सरकार द्वारा भावांतर राशि: पात्रता के अनुसार भावांतर (अंतर) की राशि राज्य सरकार द्वारा 15 दिनों के भीतर किसान के बैंक खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी जाएगी। इसमें भारत सरकार के 15% MSP अंतर के प्रावधान के अलावा शेष राशि राज्य सरकार ‘टॉप-अप’ के रूप में देगी।
निगरानी और पारदर्शिता
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य, जिला और मंडी स्तर पर समितियों का गठन किया गया है।
किसान दैनिक आवक और कीमतों की जानकारी भारत सरकार के पोर्टल agmarknet.gov.in पर भी देख सकते हैं।
सरकार का कहना है कि इस योजना से किसानों को बाजार में गिरते दामों से सुरक्षा मिलेगी और उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित हो सकेगा।
