उर्वरक सब्सिडी में पारदर्शिता के लिए DBT प्रणाली लागू
सरकार की DBT प्रणाली से उर्वरकों की सब्सिडी सीधे कंपनियों को मिलती है, जिससे किसानों को सस्ती दर पर समय पर उर्वरक उपलब्ध हो रहे हैं। पारदर्शिता और निगरानी भी मजबूत हुई है।
देशभर के किसानों को उर्वरकों की समय पर उपलब्धता और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) प्रणाली को प्रभावी तरीके से लागू किया है।
इस व्यवस्था के तहत उर्वरकों पर दी जाने वाली सब्सिडी सीधे उर्वरक कंपनियों को जारी की जाती है, जिससे किसानों को रियायती दरों पर आसानी से उर्वरक मिल पाते हैं।
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, DBT प्रणाली के जरिए उर्वरकों की बिक्री आधार-प्रमाणित प्वाइंट ऑफ सेल (POS) मशीनों के माध्यम से दर्ज की जाती है।
इससे वास्तविक बिक्री के आधार पर सब्सिडी जारी होती है और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है।
किसानों को तय कीमत पर मिलते हैं उर्वरक
इस प्रणाली के लागू होने से किसानों को कई स्तर पर लाभ मिला है। उन्हें तय कीमत पर उर्वरक उपलब्ध हो रहे हैं, जबकि वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और निगरानी भी मजबूत हुई है।
सरकार FIFO (फर्स्ट-इन-फर्स्ट-आउट) आधार पर सब्सिडी दावों का निपटारा करती है, जिससे कंपनियों को भी समय पर भुगतान सुनिश्चित होता है और सप्लाई चेन बाधित नहीं होती।
हर सीजन में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने की तैयारी
सरकार हर फसल मौसम से पहले ही उर्वरकों की मांग का आकलन करती है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग राज्यों के साथ मिलकर राज्यवार और माहवार जरूरत तय करता है।
इसके आधार पर उर्वरक विभाग मासिक आपूर्ति योजना जारी करता है, जिससे राज्यों को समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक मिल सके।
उर्वरकों की देशभर में आवाजाही पर नजर रखने के लिए एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (IFMS) का उपयोग किया जा रहा है, जिससे रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो पाती है।
राज्य सरकारों को नियमित रूप से निर्देश दिए जाते हैं कि वे समय पर ऑर्डर जारी करें और निर्माताओं व आयातकों के साथ समन्वय बनाए रखें।
राज्य के भीतर जिलों तक उर्वरकों का वितरण राज्य सरकारों द्वारा ही सुनिश्चित किया जाता है, ताकि स्थानीय स्तर पर किसी प्रकार की कमी न हो।
पर्यावरण सुरक्षा के लिए सख्त नियम
सरकार उर्वरक उत्पादन से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने के लिए भी सख्त कदम उठा रही है।
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत उर्वरक उद्योगों के लिए सख्त नियम लागू हैं, जिसमें रसायनों के सुरक्षित भंडारण, निर्माण और उपयोग के लिए मानक तय किए गए हैं।
इसके अलावा, सभी उर्वरक इकाइयों के लिए अपशिष्ट और उत्सर्जन मानकों का पालन अनिवार्य है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य बोर्ड इनकी निगरानी करते हैं और उल्लंघन करने पर कार्रवाई करते हैं।
तकनीक से बढ़ी पारदर्शिता और नियंत्रण
सरकार ने ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) को अनिवार्य किया है, जिससे उद्योगों पर लगातार नजर रखी जा सके।
डिजिटल सिस्टम और DBT के संयोजन से उर्वरक वितरण अधिक पारदर्शी, कुशल और जवाबदेह बना है केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने और सब्सिडी प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
