भारत में नैनो उर्वरकों का दबदबा: 15 करोड़ से अधिक बोतलें बिकीं

खेती में 8 प्रतिशत तक पैदावार बढ़ने का अनुमान

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, भारत में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की 15.93 करोड़ से अधिक बोतलें बिक चुकी हैं।

नैनो उर्वरकों के उपयोग से यूरिया की खपत 50 प्रतिशत तक कम और पैदावार 8 प्रतिशत तक बढ़ी है।

भारतीय कृषि क्षेत्र में नैनो तकनीक एक गेम-चेंजर साबित हो रही है।

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय द्वारा लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, नैनो उर्वरकों की शुरुआत से अब तक कुल 1,593.37 लाख (15.93 करोड़) बोतलों (500 मिली) की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई है।

इसमें 1,219.27 लाख नैनो यूरिया और 374.10 लाख नैनो डीएपी की बोतलें शामिल हैं।

लोकसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने बताया कि इन उर्वरकों के उपयोग से न केवल लागत कम हो रही है, बल्कि पैदावार में भी सुधार देखा गया है।

 

पैदावार में 8 प्रतिशत तक की वृद्धि और लागत में कमी

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और विभिन्न राज्य कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा किए गए क्षेत्रीय परीक्षणों में नैनो उर्वरकों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं:

  • यूरिया की बचत: पारंपरिक यूरिया की अनुशंसित खुराक के साथ नैनो यूरिया का छिड़काव करने से यूरिया की खपत में 25-50 प्रतिशत तक की कमी आई है।
  • बेहतर पैदावार: अध्ययनों से पता चला है कि इसके उपयोग से फसलों की पैदावार में 3 प्रतिशत से 8 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है।
  • नैनो डीएपी का प्रभाव: नैनो DAP के उपयोग से फॉस्फोरस उर्वरकों का आंशिक विकल्प (50% तक) संभव है, जिससे कुछ फसलों-जैसे आलू-में बेहतर उत्पादन परिणाम मिले हैं।

 

सरकार कर रही दीर्घकालिक रिसर्च और सुधार

नैनो उर्वरकों की दीर्घकालिक प्रभावशीलता को समझने के लिए सरकार ने कई शोध परियोजनाएं शुरू की हैं।

ICAR के साथ 5 वर्षीय नेटवर्क प्रोजेक्ट और राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद के साथ चरण-II अध्ययन के जरिए नाइट्रोजन उपयोग दक्षता और पारंपरिक उर्वरकों के विकल्प की सीमा का आकलन किया जा रहा है।

हालांकि, सरकार ने यह भी माना है कि उच्च स्तर पर (जैसे 50 प्रतिशत) प्रतिस्थापन में कुछ मामलों में असंगत परिणाम और पोषक तत्वों की कमी जैसी चुनौतियां सामने आई हैं, जिन्हें सुधारने के लिए प्रोटोकॉल तैयार किए जा रहे हैं।

 

ड्रोन तकनीक और ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना से बढ़ेगा इस्तेमाल

सरकार ने नैनो उर्वरकों के छिड़काव को आसान बनाने के लिए आधुनिक तकनीक पर जोर दिया है। 

‘नमो ड्रोन दीदी योजना’ के तहत 2023-24 से 2025-26 के लिए 1,261 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।

  • महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को अब तक 1,094 ड्रोन वितरित किए जा चुके हैं।
  • ICAR संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों ने 297 ड्रोन खरीदे हैं और 36,882 से अधिक प्रदर्शन आयोजित किए हैं, जिससे 426579 लाख किसानों को लाभ हुआ है।
  • महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इन योजनाओं का व्यापक असर दिख रहा है, हालांकि दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में अभी ड्रोन प्रदर्शन आयोजित नहीं किए गए हैं।

 

देशभर में अभियान और जागरूकता कार्यक्रम

सरकार और उर्वरक कंपनियों के सहयोग से देश के 15 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में नैनो DAP को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

इसके अलावा 100 जिलों में नैनो यूरिया प्लस के फील्ड डेमो और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

किसानों तक इन उर्वरकों की पहुंच बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्रों पर उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, साथ ही वेबिनार, किसान सम्मेलन और क्षेत्रीय भाषाओं में प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।

 

हजारों ड्रोन डेमो और लाखों किसानों को लाभ

कृषि यंत्रीकरण उप-मिशन के तहत ICAR और कृषि संस्थानों ने 2022 से 2026 के बीच 297 ड्रोन खरीदे और 36,882 फील्ड डेमो आयोजित किए।

इन डेमो के जरिए 38 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र कवर हुआ और लाखों किसानों को नई तकनीक की जानकारी मिली।

रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री के अनुसार सरकार का फोकस केवल नैनो उर्वरकों को बढ़ावा देने पर नहीं, बल्कि संतुलित उर्वरक उपयोग सुनिश्चित करने पर भी है।

इसके लिए मानकीकृत प्रोटोकॉल, प्रशिक्षण और जमीनी स्तर पर प्रदर्शन कार्यक्रमों को बढ़ाया जा रहा है।

सरकार का मानना है कि सही तरीके से उपयोग किए जाने पर नैनो उर्वरक कृषि में लागत घटाने, पर्यावरण संरक्षण और उत्पादकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।