शुगर फ्री ‘सोना मोती’ गेहूं की खेती से चमकी किसान की किस्मत

Sugar Free Sona Moti Wheat: मंदसौर के किसान वल्लभ पाटीदार सोना मोती गेहूं की जैविक खेती से 2 से 3 गुना अधिक लाभ का दावा करते हैं। जानिए इसकी खेती, उत्पादन और बीज की जानकारी।

देश में जहाँ एक ओर फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए नई आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्राचीन और पारंपरिक फसलों की किस्मों के संरक्षण की मुहिम भी तेजी से रंग ला रही है।

आज के दौर में भी फसलों की ऐसी कई प्राचीन किस्में मौजूद हैं, जो न केवल उच्च पैदावार देती हैं बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।

इन्हीं में से गेहूं की एक बेहद दुर्लभ और प्राचीन किस्म है — ‘सोना मोती’, जिसे बाजार में ‘शुगर फ्री गेहूं’ के नाम से भी जाना जाता है।

 

किसान ने किया 3 गुना लाभ का दावा

मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के चिल्लोद पिपलिया गाँव के प्रगतिशील किसान वल्लभ पाटीदार पिछले 5 वर्षों से सोना मोती गेहूं की जैविक खेती कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि सोना मोती की खेती से सामान्य गेहूं के मुकाबले 2 से 3 गुना अधिक मुनाफा हो रहा है।

वर्ष 2025 के रबी सीजन में वल्लभ पाटीदार ने 5 बीघा जमीन में जैविक सोना मोती गेहूं की बुवाई की थी। जिससे उन्हें औसतन 50 क्विंटल कुल उत्पादन (10 क्विंटल प्रति बीघा) प्राप्त हुआ।

बाजार और मंडियों में इस गेहूं की भारी मांग होने के कारण इसे बेचकर उन्होंने लगभग 3 लाख रुपए की शानदार कमाई की।

 

कम लागत, कम पानी और बीमारियों से सुरक्षित किस्म

किसान वल्लभ पाटीदार के अनुसार, सोना मोती किस्म की खेती करने के कई बड़े फायदे हैं:

  • सूखा सहन करने में सक्षम: यह किस्म सूखे का सामना आसानी से कर सकती है।
  • कीट व रोगमुक्त: इसमें रासायनिक गेहूं की तुलना में बीमारियों और कीटों का प्रकोप काफी कम होता है।
  • 40% कम खाद की जरूरत: सामान्य किस्मों के मुकाबले इसमें 40 प्रतिशत तक कम खाद लगती है।
  • कम सिंचाई: इसमें पानी की भी काफी बचत होती है।
  • जैविक खेती से लागत न्यूनतम: पूरी तरह जैविक (Organic) पद्धति से खेती करने के कारण इसकी उत्पादन लागत नाममात्र की आती है।

 

100 से ज्यादा किसानों को जोड़ा, बीज भी कर रहे उपलब्ध

वल्लभ पाटीदार खुद खेती करने के साथ-साथ पिछले 5 वर्षों से आसपास के क्षेत्रों और अन्य जिलों के किसानों को भी इस प्राचीन किस्म को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

उनकी इस पहल का ही नतीजा है कि आज अकेले मंदसौर जिले में लगभग 100 से किसान सोना मोती गेहूं की खेती कर रहे हैं।

वल्लभ पाटीदार मंडियों में गेहूं बेचने के साथ ही अन्य किसानों को खेती के लिए इसका बीज भी उपलब्ध कराते हैं।

जो किसान भाई सोना मोती गेहूं का बीज खरीदना चाहते हैं या इसकी रासायनिक व जैविक खेती की पूरी जानकारी हासिल करना चाहते हैं, वे सीधे उनके मोबाइल नंबर +91-9406830324 पर संपर्क कर सकते हैं।

 

2000-4000 साल पुरानी विरासत: जानिए सोना मोती गेहूं की मुख्य विशेषताएं

सोना मोती भारत की एक अत्यंत प्राचीन और दुर्लभ किस्म है, जो लगभग 2000 से 4000 वर्ष पुरानी मानी जाती है।

  • ग्लूटेन फ्री और लो ग्लाइसेमिक: पारंपरिक गेहूं की तुलना में इसमें ग्लूटेन का स्तर काफी कम होता है और ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) भी निम्न होता है।
  • 3 गुना ज्यादा फोलिक एसिड: इसमें साधारण अनाजों की तुलना में 3 गुना अधिक फोलिक एसिड पाया जाता है, जो शरीर में रक्तचाप (Blood Pressure) को नियंत्रित रखने और दिल को दुरुस्त रखने में बेहद मददगार है।
  • 40% ज्यादा प्रोटीन: सेहत के लिहाज से इसमें आम गेहूं से 40% अधिक प्रोटीन होता है।
  • मिनरल्स का खजाना: सोना मोती गेहूं में जिंक, आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम और प्राकृतिक फाइबर प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

 

किसानों के लिए कम लागत और बेहतर बाजार की संभावना

सोना मोती गेहूं की खेती किसानों को पारंपरिक किस्मों के संरक्षण के साथ अलग बाजार उपलब्ध करा सकती है।

इसकी खेती शुरू करने से पहले किसान बीज, स्थानीय परिस्थितियों में संभावित उत्पादन, बाजार की उपलब्धता और खरीदारों की मांग की जानकारी जरूर लें।