अभ्युदय मध्य प्रदेश में पात्र हितग्राहियों को चिह्नित करके पहुंचाया गया लाभ
प्रदेश में एक बार फिर राजस्व से जुड़े लंबित मामलों को निपटने के लिए महाअभियान चलाया जाएगा। यह अप्रैल से प्रारंभ किया जा सकता है।
इसमें सुशासन की दृष्टि से महत्वपूर्ण नामांकन, सीमांकन, बटांकन, खसरा सुधार के काम प्राथमिकता के साथ किए जाएंगे।
इसके साथ ही कृषि से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ पहुंचाया जाएगा। पात्र हितग्राहियों का चिह्नांकन भी होगा।
कृषक कल्याण वर्ष
सरकार वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। प्रयास यह है कि इसमें भूमि से जुड़े अविवादित नामांकन, सीमांकन और बटांकन के प्रकरणों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।
साथ ही खसरे में सुधार हो जाए। दरअसल, मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने जब कलेक्टर-कमिश्नर कांफ्रेंस की थी, तब उन्होंने निर्देश दिए थे कि सुशासन के लिए जरूरी है कि कोई भी काम विलंबित न हो। जो सेवाएं निर्धारित अवधि में दी जानी हैं, वे उसमें ही मिलें।
कलेक्टर और प्रभारी मंत्रियों की रहेगी मुख्य भूमिका
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने भी दो बार कलेक्टर-कमिश्नर कांफ्रेंस कर इस पर ही जोर दिया। जिले की रैंकिंग कराकर जिलों को निर्देश दिए।
अब मैदानी स्तर पर इसके लिए अभियान चलाया जाएगा। इसकी अगुवाई कलेक्टर करेंगे और कमिश्नर का काम पर्यवेक्षण का रहेगा।
प्रभारी मंत्री नियमित तौर पर समीक्षा करेंगे। राजस्व के मामलों को निपटाने के साथ-साथ कृषि से जुड़ी योजनाओं का लाभ किसानों को दिलाया जाएगा।
किसानो की आमदनी बढ़ाने पर जोर
प्रत्येक जिले में पात्र किसानों की सूची तैयार होगी और प्राथमिकता निर्धारित कर लक्ष्य के अनुरूप काम किया जाएगा।
इतना ही नहीं किसानों को प्राकृतिक, उद्यानिकी खेती के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में आगे आने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि उनकी आमदनी में वृद्धि हो सके।
समर्थन मूल्य पर उपार्जन होगा प्रारंभ
उधर, गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उर्पाजन भी इसी माह प्रारंभ किया जाएगा। इसके साथ ही पंजीकृत किसानों को उपज बेचने में कोई परेशानी न आए, यह सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टरों के नेतृत्व में टीमें बनाई जाएंगी।
इस बार 2,585 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य तय है।
साढ़े तीन हजार करीब उपार्जन केंद्र बनाए जा रहे हैं, जहां किसान स्लाट बुक करके सुविधा के अनुसार उपज बेच सकेंगे।
