5 बड़ी योजनाओं का विस्तार 5 साल के लिए किया
सरसों पर भावांतर, उड़द पर बोनस देने के प्रस्ताव मंजूर
पंचायतें ही चलाएंगी सिंगल नल-जल योजना
विधानसभा के बजट सत्र के बीच मोहन सरकार ने दो बड़े निर्णय लिए। किसानों के कल्याण वाली 10,500 करोड़ की पांच योजनाओं का विस्तार पांच साल के लिए किया है।
इनमें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन, नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मित योजना विद्या हैं। ये 31 मार्च 2031 तक जारी रहेंगी।
सिंगल नल-जल योजनाओं के संचालन का जिम्मा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) से लेकर ग्राम पंचायतों को सौंपा है। इन प्रस्तावों को सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को विधानसभा परिसर में हुई कैबिनेट में मंजूरी दी गई।
सीएम ने सोमवार को सरसों पर भावांतर देने व उड़द की खरीदी पर प्रति क्विंटल 600 रुपए बोनस देने संबंधी वक्तव्य दिया था। इन प्रस्तावों को भी मंजूरी दी।
कैबिनेट में सिंगल नल-जल योजनाओं का संचालन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को देने संबंधी निर्णय हुआ। समूल नल-जल योजनाओं का संचालन जल निगम ही करेगा। इसके लिए निगम 10-10 साल के टेंडर कर चुका है।
असल में सिंगल नल जल योजना के संचालन को लेकर पीएचई और पंचायत-ग्रामीण विकास के बीच ठीक से तालमेल नहीं बैठ पा रहा था, क्योंकि योजनाएं पंचायतों में चल रही है और पीएचई के पास संचालन का जिम्मा था।
पीएचई खुद मैनपावर से जूझ रहा है। कई बार ऐसा भी हुआ कि संसाधन के बाद भी पंचायतों में पानी सप्लाई नहीं होता था।
विस्तार वाली योजनाएं
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई
‘पर hich ड्रॉप-मोर क्रॉप’ के लिए 2,393 करोड़ 97 लाख दिए। मकसद डिप और स्प्रिंकलर से सिंचाई को बढ़ावा देकर पानी की बर्बादी कम करना और ज्यादा उत्पादन लेना है। इसके तहत सूक्ष्म सिंचाई यंत्रों पर 55% तक सब्सिडी, डिग्गी निर्माण में सहायता मिलती है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास
2,008 करोड़ 68 लाख रुपए दिए। कृषि विकास में वृद्धि करना, कृषि घटकों को प्रभावी व टिकाऊ खेती को अपनाना शामिल।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन
3,285 करोड़ 49 लाख रुपए। खाद्य सुरक्षा, उत्पादकता बढ़ाने और पोषण सुरक्षा मजबूती के काम।
नेशनल मिशन ऑन नेचरल फार्मिंग
1011 करोड़ 59 लाख रुपए दिए। प्राकृतिक खेती का क्षेत्रफल उत्पादन बढाने, मिट्टी की उर्वरकता बनाए रखने, पर्यावरण का संरक्षण एवं रसायन मुक्त खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराना मकसद। योजना के लिए केंद्र 60 प्रतिशत एवं राज्य 40 प्रतिशत राशि देता है।
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन
ऑयल सीड के लिए 1,793 करोड़ 87 लाख दिए। प्रदेश में तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहित कर आयातित खाद्य तेलों पर भारत की निर्भरता कम करने और किसानों की आय में बढ़ोतरी करने, उन्हें आत्मनिर्भर बनाने आदि काम होते हैं।
