हर तरह से फायदेमंद है
Artificial Insemination हैल्थ में सुधार के साथ-साथ प्रोडक्शन भी बढ़ रहा है. विकल्प होने की वजह से प्रोडक्ट की क्वालिटी में भी सुधार आ रहा है. इसे कृत्रिम गर्भाधान (एआई) कहा जाता है. इसका इस्तेमाल अब सिर्फ गाय-भैंस ही नहीं भेड़-बकरी और दूसरे पालतू जानवरों में भी किया जा रहा है.
Artificial Insemination पशुपालन का पुराना तरीका है कि गाय-भैंस हीट में आए तो उसे किसी भी सांड (बुल) के पास ले जाकर गाभिन करा दो.
लेकिन एनिमल एक्सपर्ट का कहना है कि ये तरीका किसी भी तरह से सुराक्षित नहीं है. इसमे ये भी पता नहीं चल पाता है कि सांड बीमार है या हेल्दी. हालांकि अब इस तरीके में बदलाव आ रहा है.
यही वजह है कि अब एक सांड अपनी जिंदगी में 200 नहीं 20 हजार गायों को गाभिन कर रहा है. इसका फायदा ये कि इससे लोगों को रोजगार भी मिल रहा है और गाय-भैंसों की संख्या भी बढ़ रही है.
सबसे बड़ा फायदा तो ये ही है कि प्रोडक्शन और क्वालिटी दोनों ही में सुधार होता है.
इस तकनीक को पशुपालन में कृत्रिम गर्भाधान (एआई) के नाम से जाना जाता है. और इस तकनीक की सबसे बड़ी बात ये कि इसकी मदद से पशुओं को गाभिन कराने पर सांड की पूरी डिटेल भी मिल जाती है.
सांड की हैल्थ से लेकर उसके फैमिली ट्री तक के बारे मे पता चल जाता है. लेकिन इसके बावजूद एआई कराने से पहले कुछ मानकों पर सांड की जांच कर लेना जरूरी है.
एआई सिस्टम किस तरह काम करता है
सेंट्रल बफैलो रिसर्च इंस्टीट्यूट, हिसार, हरियाणा के पूर्व सीनियर साइंटिस्ट डॉ. सज्जन सिंह ने बताया कि औसत एक सांड चार एमएल वीर्य डिस्चार्ज करता है.
इतने वीर्य में एआई के लिए 200 डोज तैयार हो जाती हैं. अब यहां असल काम शुरू होता है एआई टेक्नीशियन का.
एआई से गर्भाधान का औसत 40 से 50 फीसद है. लेकिन कई टेक्नीशियन ऐसे भी हैं जो 80 फीसद तक रिजल्ट देते हैं.
इस तरह एक सांड के चार एमएल वीर्य से 80 से 150 तक गायों को गाभिन किया जा सकता है.
एक सांड चार एमएल वीर्य डिस्चार्ज करेगा या छह एमएल तक ये उस सांड की हैल्थ और दूसरी चीजों पर निर्भर करता है.
ये है एआई के लिए सांड के वीर्य के मानक
- बैल शेड, वीर्य संग्रह और प्रोसेसिंग लैब को सुराक्षित तरीके से बनाया गया हो.
- सभी वाहन और कर्मचारियों के पैर और टायर डीप बाथ एरिया से गुजारे जाते हैं.
- सीमेन सेंटर में धूल कम करने के लिए खूब पेड़ लगाए जाते हैं.
- पशु के संपर्क में आने वाले कर्मचारियों की टीबी-ब्रुसेलोसिस की दो साल में एक बार जांच होनी चाहिए.
- पशुओं को सेंटर में तभी एंट्री दी जाती है जब वो क्वारंटीन समेत सभी तरह के टेस्ट पास कर लेते हैं.
- किसी भी बीमार जानवर को तुरंत अलग कर उसका इलाज किया जाता है.
- बैल शेड को नियमित आधार पर साफ और कीटाणु रहित किया जाता है.
- वीर्य कलेक्शन और प्रोसेसिंग लैब को हर रोज काम के बाद कीटाणु रहित किया जाता है.
- वीर्य कलेक्शन के समय पशु के वक्ष, पेट के निचले और सामने के हिस्से को साफ किया जाता है.
- पशुओं को चारा, दाना और पानी इस तरह से दिया जाता है कि उसका पशुओं की हैल्थ पर खतरा ना हो.
- सेंटर में पशु को भूख, प्यास, परेशानी दर्द और चोट से मुक्त रखा जाता है.
