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कम पानी और कम खर्चे में बेहतर उपज देती है अलसी की खेती

अलसी के खेती करने के लिए किसानों को अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है.

जिस वजह से यह राजस्थान के गर्मी वाले इलाकों में बड़ी आसानी से हो जाती है.

यही कारण है कि इसकी खेती कहीं पर भी आसानी से की जा सकती है…

 

खेती का तरीका और उत्पादन

अलसी के बीज स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होते हैं. इसके सेवन कैंसर जैसी घातक बीमारी को नियंत्रण किया जाता है.

साथ ही अलसी पाचन, ब्लड शुगर को नियंत्रित, पेट सम्बंधित समस्याएं, कब्ज आदि को ठीक करने में भी सहायक है.

अब इसका इस्तेमाल इतना स्वास्थ्यवर्धक है, तो बाजार में इसकी मांग भी हमेशा ही बनी रहती है.

ऐसे में किसान इसकी खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं.

अलसी की खेती की एक और खास बात यह है कि इसे कम पानी में आसानी से उगाया जा सकता है.

अलसी की खेती राजस्थान जैसे क्षेत्रों में काफी अधिक मात्रा में की जा रही है.

इसका कारण यह है कि इस खेती को पानी की कम मात्रा और कम खर्च के साथ किया जा सकता है.

तो चलिए आज हम इसकी खेती के बारे में विस्तार से जानते हैं –

 

कम पानी में होती है खेती

अलसी की खेती के लिए अधिक पानी की आश्यकता नहीं होती है.

अगर किसान अलसी की फसल में केवल एक बार सिंचाई करते हैं और और एक बार बारिश हो जाती है तो इसके बाद इस फसल में पानी की जरूरत ख़त्म हो जाती है.

इस फसल को करने के बाद किसानों को बहुत ही कम खर्चे के साथ ज्यादा मुनाफा होता है.

 

कम खर्च में मिलता है अच्छा उत्पादन

अलसी की फसल में निराई-गुड़ाई की भी जरूरत नहीं पड़ती है, साथ ही खरपतवार भी ना के बराबर ही पनपता है,

क्योंकि उससे पहले ही वह गेहूं की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए जिस दवा का इस्तेमाल करते हैं.

वहीं दवा अलसी की खेती के लिए उपयोग में लाते हैं.

जब पौधा बड़ा हो जाता है तो उसमें यूरिया का छिड़काव कर देते हैं फिर उसमें एक ही बार सिंचाई करते हैं.

 

अलसी की उत्पादन क्षमता

अलसी की यह फसल महज 95 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. साथ ही एक बीघा जमीन से 4 क्विंटल उत्पादन तक प्राप्त हो सकता है.

इसके अलावा, प्रति क्विंटल अलसी का भाव लगभग 4000-6000 रुपये मिल जाते हैं.

यह फसल किसानों को कम खर्चे में अच्छा मुनाफा देती है. किसान इस खेती को व्यवसाय के तौर पर भी कर सकते हैं.

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