किसानों को समय पर मिलेगा योजनाओं का लाभ
मध्य प्रदेश के CM डॉ. मोहन यादव ने ‘सारा’ और ‘उन्नति’ एग्री-जीआईएस प्रणाली की तारीफ की। जानें कैसे AI और सैटेलाइट के जरिए 5 करोड़ खेतों की डिजिटल निगरानी हो रही है।
मध्यप्रदेश सरकार कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि राज्य में ‘सारा’ और ‘उन्नति’ एग्री-GIS प्रणाली के माध्यम से फसल प्रबंधन को अधिक सटीक, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है।
इस प्रणाली के तहत उपग्रह चित्रों, ड्रोन सर्वेक्षण और खेतों की वास्तविक तस्वीरों का विश्लेषण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) तकनीक से किया जा रहा है। इससे फसल निगरानी और उत्पादन आकलन को वैज्ञानिक आधार मिल रहा है।
लाखों खेतों की तस्वीरों का AI से विश्लेषण
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘सारा’ ऐप के जरिए किसानों और सर्वेक्षकों द्वारा भेजी गई लाखों तस्वीरों का डीप लर्निंग तकनीक से विश्लेषण किया जा रहा है।
इससे खेत स्तर पर बोई गई फसलों की पहचान और सत्यापन संभव हो रहा है।
रबी और खरीफ सीजन में अब तक 5 करोड़ 37 लाख से अधिक खेतों की तस्वीरों का विश्लेषण किया जा चुका है।
इससे 3 करोड़ से अधिक भूमि खंडों की डिजिटल क्रॉप मैपिंग की गई है। वर्ष-2022 में जहाँ सटीकता 66 प्रतिशत थी, वहीं वर्ष-2025 तक यह बढ़कर लगभग 85 प्रतिशत हो गई है।
सरकार का कहना है कि इससे फसल बीमा, सरकारी खरीद और कृषि योजनाओं का लाभ किसानों तक अधिक पारदर्शी तरीके से पहुंच सकेगा।
राज्य में अब पटवारी हल्का स्तर के लगभग 22 हजार क्षेत्रों में फसल उत्पादन का आकलन भी किया जा रहा है। इसके लिए सैटेलाइट इमेज और रैंडम फॉरेस्ट मॉडल का उपयोग किया जा रहा है।
किसानों को आसानी से मिलेगा मुआवजा
सरकार के अनुसार यह तकनीक किसानों, सर्वेक्षकों और बीमा कंपनियों के लिए काफी उपयोगी साबित होगी।
इससे प्राकृतिक आपदा या जलवायु परिवर्तन की स्थिति में फसल नुकसान का समय पर आकलन किया जा सकेगा और किसानों को मुआवजा मिलने में आसानी होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, राजस्व विभाग और कृषि विभाग के संयुक्त प्रयास से विकसित यह पहल मध्यप्रदेश की कृषि व्यवस्था को तकनीक आधारित और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
