हरदाः एक एकड़ में लगाए एक हजार पौधे, फल आने को तैयार
इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद लाखों रुपए के पैकेज की निजी कंपनी की नौकरी छोड़ जितेंद्र राजपूत ने जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाया है।
एक साल पहले एक एकड़ में अमरूद के डायमंड किस्म के 1000 पौधे लगाए थे। अब फल तैयार होने लगे हैं।
उन्होंने बताया डायमंड किस्म वर्ष में दो बार फल देता है। पौधे में डेढ़ साल में फूल आने लगते हैं। मंडी में अमरूद का थोक भाव 80 से 120 रुपए प्रति किलो तक रहता है।
जितेंद्र के अनुसार यह पौधा धीरे-धीरे फल देता है और हर साल उत्पादकता बढ़ती जाती है। एक वर्ष बाद एक पौधा 50 किलो तक फल देगा। इससे प्रतिवर्ष 5 से 7 लाख रुपए की आय प्राप्त कर सकते हैं।
जितेंद्र ने अमरूद के पौधे 5 बाय 8 फीट की दूरी पर लगाए हैं, जिससे एक एकड़ में 1000 पौधे समायोजित हुए।
उन्होंने बताया कि वे अमरूद के पौधों के बीच अदरक लगाने पर भी विचार कर रहे हैं। एक एकड़ में सहजन (मुनगा) और उसके नीचे गेंदा फूल लगाने की भी योजना है।
150 रुपए नग के भाव पर खरगोन से खरीदे पौधे
जितेन्द्र के अनुसार उन्होंने 150 रुपए प्रति नग भाव से पौधे खरगोन से खरीदे थे। इनमें डिप के माध्यम से सिंचाई करने के साथ ही जैविक खाद का उपयोग किया। पौधों की ग्रोथ के लिए जैविक दवाई में गुड़ के पानी के साथ सिंचाई की।
फंगीसाइड के लिए छाछ का उपयोग किया। पौधे लगाने के बाद एक बार ही जैविक खाद व दवाओं का उपयोग किया जाता है।
इससे लागत में कमी आने के साथ ही फल मीठा निकलता है। आम आमरूद के तुलना में दो से गुना तक भाव मिलते हैं।
जैविक खेती के फायदे
केमिकल फ्री भोजन : जैविक खेती में सिंथेटिक कीटनाशकों और रासायनिक खादों का उपयोग नहीं होता, जिससे भोजन में हानिकारक तत्वों के अवशेष नहीं रहते। गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है।
अधिक पोषक तत्त्व : जैविक रूप से उगाई गई फसलों में विटामिन, खनिज (जैसे विटामिन सी, आयरन, मैग्नीशियम) और एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा सामान्य सामान्य फसलों से अधिक होती है।
जल संरक्षण, शुद्धता : जैविक खेती से जल प्रदूषण रुकता है। जैविक मिट्टी की जल धारण क्षमता बेहतर होती है। सिंचाई की कम जरूरत पड़ती है।
पर्यावरण के लिए फायदे : मिट्टी में मित्र कीड़े, सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ती है। जमीन की उपजाऊ क्षमता बनी रहती है।
