पंजाब-हरियाणा के बाद एमपी में फैला ‘गेहूं का मामा’

गेहूं जैसा दिखने वाला खरपतवार किसानों के लिए बना बड़ी चुनौती

पंजाब और हरियाणा के बाद अब मध्य प्रदेश में भी गेहूं की फसल पर एक नए खरपतवार ‘गेहूं का मामा’ का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। यह खरपतवार दिखने में बिल्कुल गेहूं जैसा होता है, जिससे किसान इसकी पहचान समय पर नहीं कर पाते और नुकसान दोगुना हो जाता है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने इस खरपतवार के बढ़ते प्रकोप की पुष्टि की है। परिषद की रिपोर्ट के अनुसार जबलपुर, खरगोन, विदिशा, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, कटनी, नरसिंहपुर सहित कई जिलों में गेहूं की फसल में ‘गेहूं का मामा’ पाया गया है। इससे किसानों और कृषि वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया गया, तो गेहूं की फसल को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

फसल में 30 से 35 प्रतिशत तक नुकसान की आशंका

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह खरपतवार गेहूं के साथ-साथ खेत की मिट्टी से पोषक तत्व, पानी और खाद तेजी से  सोख लेता है, जिससे मुख्य फसल कमजोर हो जाती है। दानों का भराव कम होने से सीधे उत्पादन पर असर पड़ता है।

अनुमान है कि अगर समय पर नियंत्रण नहीं हुआ, तो गेहूं के उत्पादन में 30 से 35 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।

केवल जबलपुर जिले में ही करीब 1.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती होती है, जहां लगभग 50 हजार टन उत्पादन होता है। वहीं, मध्य प्रदेश करीब 10 लाख हेक्टेयर गेहूं उत्पादन के साथ देश में दूसरा स्थान रखता है। ऐसे में यह समस्या राज्य की गेहूं पैदावार के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

पहचान में धोखा, इसलिए बढ़ रहा नुकसान

गेहूं का मामा’ नाम से पहचाना जाने वाला यह खरपतवार शुरुआती अवस्था में बिल्कुल गेहूं की तरह दिखाई देता है। यही कारण है कि किसान इसे समय पर नहीं पहचान पाते।

इसमें भी बाली निकलती है, लेकिन इसकी बालियों में कांटे नहीं होते, और इसका कॉलर वाला हिस्सा हल्के गुलाबी रंग का नजर आता है। यह पौधा गेहूं की जड़ों को जकड़कर उसकी बढ़वार को प्रभावित करता है, जिससे फसल का विकास रुक जाता है।

तेजी से फैल रहा है खतरा

पहले यह खरपतवार बहुत कम दिखाई देता था, लेकिन अब इसकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। प्रदेश के कई जिलों में खेतों की जांच के दौरान गेहूं की फसल में इसका प्रकोप सामने आया है, जो एक चिंताजनक स्थिति है।

आईसीएआर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विजय चौधरी के अनुसार,

“बुवाई के समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और अच्छी गुणवत्ता की दवाओं का उपयोग करना जरूरी है। यदि शुरुआती अवस्था में इसका नियंत्रण कर लिया जाए, तो 95 प्रतिशत तक इस खरपतवार को रोका जा सकता है।”

किसानों के लिए जरूरी सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि किसान बुवाई से पहले बीज की गुणवत्ता पर ध्यान दें, खेत की नियमित निगरानी करें और शुरुआती अवस्था में ही खरपतवार नियंत्रण के उपाय अपनाएं। समय पर पहचान और सही प्रबंधन से ‘गेहूं का मामा’ से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।

कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश के गेहूं उत्पादक किसानों के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है। जागरूकता और समय पर कार्रवाई ही इस नई चुनौती से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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