सीड ड्रिल-बेसल डोज से बोवनी, 8 क्विंटल बढ़ेगा उत्पादन

कटनी. ढीमरखेड़ा क्षेत्र के ग्राम पंचायत बम्हनी के आश्रित ग्राम बनहरी के किसान पारस पटेल प्रेरणास्रोत बनकर सामने आए हैं।

उन्होंने इस रबी सीजन में सुपर सीड ड्रिल पद्धति और बेसल डोज खाद का प्रयोग कर नौ एकड़ में गेहूं की बोवनी की है।

उत्पादन में प्रति एकड़ 5 से 8 क्विंटल तक बढ़ने की उम्मीद है। नवंबर में की गई बोवनी के बाद वर्तमान में गेहूं की फसल लहलहा रही है। बालियां निकल आई है।

कृषि अधिकारी आरएन पटेल की सलाह पर किसान पारस ने डीबीडब्ल्यू-187 किस्म के गेहूं की खेती की।

पारस ने बताया कि परंपरागत छिटवा बोवनी में एक एकड़ में 80-100 किलो बीज लगता था।

सुपर सीड ड्रिल पद्धति से मात्र 50 किलो बीज प्रति एकड़ पर्याप्त रहा। इससे बीज लागत लगभग आधी हो गई।

 

सीधे जड़ों तक पहुंची खाद

किसान ने बोवनी के समय 12:32:16 उर्वरक का प्रयोग किया, जिससे पौधों को प्रारंभिक अवस्था में ही संतुलित पोषण मिला।

इस खाद में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलन होने से खाद सीधे जड़ों तक पहुंची। पौधे मजबूत, हरे-भरे व चमकदार बने।

पारंपरिक पद्धति में डीएपी डालकर बाद में यूरिया देने से शुरुआती 20 दिन तक नाइट्रोजन की कमी रहती है। इससे पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है।

 

पहले 3800 और अब 2300 रुपए आई लागत

पारस पटेल ने बताया कि पहले एक एकड में खाद पर लगभग 3800 रुपए तक खर्च होते थे, जबकि इस पद्धति में मात्र 2300 रुपए की खाद लगी।

सुपर सीड ड्रिल से बोवनी की गहराई डेढ़ से दो इंच समान रहने से फसल की लंबाई और बढ़वार में एकरूपता आई है।

इससे उत्पादन 20 से 22 क्विंटल प्रति एकड़ या उससे अधिक होने की संभावना है।

 

अन्य किसानों के लिए मिसाल

पारस अब आसपास के किसानों को भी इस तकनीक से खेती करने को प्रेरित कर रहे हैं। पास के ग्राम पिपरिया शुक्ल के किसान भी यह पद्धति अपना रहे हैं।

कृषि अधिकारी आरएन पटेल ने बताया कि बड़वारा, ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र में अब भी लगभग 95% किसान छिटवा बोवनी कर रहे हैं।

सीड ड्रिल और बेसल डोज पद्धति अपनाने से उत्पादन बढ़ेगा। इस तकनीक से किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।