अभी भी है मौका, इस चारे का बनाएं साइलेज

गर्मियों में खूब आएगा काम

Fodder Silage हालांकि पशु को लगातार एक ही तरह का हरा चारा देना बहुत ज्यादा फायदेमंद नहीं रहता है. जबकि होना ये चाहिए पशु का दिनभर का चारा ऐसा हो जो उसकी जरूरत के सभी तत्वों को पूरा करता हो.

लेकिन गर्मियों में ऐसे चारे की कमी रहती है. लेकिन इस कमी को दूर करने के लिए चारा एक्सपर्ट के मुताबिक सितम्बर में बोई गई दलहनी चारा फसल का साइलेज बनाकर गर्मियों में इसकी पूर्ति की जा सकती है.

उत्पादन करने वाले पशु गाय-भैंस हो या भेड़-बकरी, सभी के लिए पोषण से भरपूर खुराक की जरूरत होती है. एनिमल न्यूट्रीशन एक्सपर्ट ऐसी खुराक को बैलेंस डाइट कहते हैं. जिस खुराक में कर्बोहाइड्रेड, प्रोटीन और दूसरे सभी मिनरल्स शामिल हों उसे ही बैलेंस डाइट कहा जाता है. उत्पादन करने वाले जिस पशु को ये खुराक मिलती है तो उसकी ग्रोथ भी अच्छी होती है और दूध का उत्पादन भी भरपूर करता है. मीट उत्पादन के लिए पशुओं की बॉडी ग्रोथ बहुत जरूरी होती है. इसलिए दूध देने और मीट के लिए पाले जाने वाले पशुओं के लिए बैलेंस डाइट बहुत जरूरी है.

ऐसा नहीं है कि पशु हैं तो कुछ भी खाने को दे दो. इसमे दाने का अहम रोल होता है. और कई बार पशुपालक दाना खि‍लाने में कंजूसी कर देते हैं.

लेकिन दाने की भरपाई के लिए पशुओं को दलहनी चारा भी खि‍लाया जा सकता है. बीते साल सितम्बर में बोया गया दलहनी चारा अभी भी काटा जा रहा है.

गर्मियों में भी पशुओं को दलहनी चारा खाने को मिले इसके लिए साइलेज बनाकर रखा जा सकता है.

 

अगस्त-सितम्बर तक फायदा देगा दलहनी चारा

चारा एक्सपर्ट डॉ. बीएल चौधरी का कहना है कि हरे चारे की एक फसल कम से कम ऐसी होनी चाहिए जो एक बार लगाने के बाद कई साल तक उपज दे.

जैसे नेपियर घास को बहुवर्षिय चारा कहा जाता है. बहुवर्षिय चारा वो होता है जो एक बार लगाने के बाद लम्बे वक्त तक उपज देता है.

नेपियर घास भी उसी में से एक है. एक बार नेपियर घास लगाने के बाद करीब पांच साल तक हरा चारा लिया जा सकता है.

लेकिन ऐसा भी नहीं किया जा सकता है कि पशुओं को सिर्फ नेपियर घास ही खि‍लाते रहें. अगर आप पशु को नेपियर घास दे रहे हैं तो उसके साथ उसे दलहनी चारा भी खि‍लाएं.

इसके लिए सितम्बर में नेपियर घास के साथ लगाए गए लोबिया का इस्तेमाल नेपियर के साथ कर सकते हैं.

हर मौसम में आप नेपियर के साथ सीजन के हिसाब से दूसरा हरा चारा लगा सकते हैं. ऐसा करने से पशु को नेपियर घास से कर्बोहाइड्रेड है तो लोबिया से प्रोटीन और दूसरे मिनरल्स मिलते हैं.

और इसी तरह की खुराक से भेड़-बकरी में मीट की ग्रोथ होती है तो गाय-भैंस में दूध का उत्पादन बढ़ता है. और साइलेज बनाकर इसे पशुओं को लम्बे वक्त तक खि‍लाया जा सकता है.

जिस तरह से इंसानों की डाइट में कर्बोहाइड्रेड, प्रोटीन और दूसरे मिनरल्स की जरूरत होती है, ठीक उसी तरह से ग्रोथ और उत्पादन के लिए पशुओं को भी उतनी ही जरूरत होती है.