कृषि विभाग की सलाह- नुकसान से बचने 31 तक अनिवार्य रूप से कराएं फसल बीमा
मानसून की बेरुखी
अब तक महज 228 मिमी बारिश, पिछले साल इस समय तक बरस चुका था 407 मिमी पानी
कृषि प्रधान हमारे जिले को भारत सरकार ने अलनीनो प्रभावित जिला घोषित किया है। इससे इस बार अल्प वर्षा के साथ सूखे का संकट बना हुआ है।
ऐसा 13 वर्ष बाद हो रहा है, जब जिले में अल्प वर्षा की स्थिति बन रही है। इसके पहले वर्ष 2013-14 में भी यही स्थिति बनी थी।
जिले में अब तक महज 228 मिमी बारिश हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 407 मिमी बारिश हो चुकी थी।
इस बार जिले में 3.36 लाख हेक्टेयर में खरीफ की बोवनी हुई है। इसमें सबसे ज्यादा बोवनी 2.87 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की की गई है।
अलनीनो के प्रभाव के कारण पिछले 10 दिनों से बारिश नहीं हुई है। इस लंबी खेंच का असर अब सोयाबीन की फसल पर नजर आने लगा है और सोयाबीन के पत्ते पीले पड़ने लगे हैं।
यदि अगले तीन से चार दिनों में बारिश नहीं हुई तो बड़ी दिक्कत आएगी और फसल सूखने लगेगी, जिससे दोबारा बोवनी की स्थिति बन सकती है। सरकार ने रतलाम सहित प्रदेश के 8 जिलों को अलनीनो प्रभावित घोषित किया है।
इन जिलों को अलनीनो प्रभावित घोषित किया
- रतलाम,
- आलीराजपुर,
- अनूपपुर,
- बैतूल,
- डिंडोरी,
- मंडला,
- शहडोल,
- सिंगरौली और
- मंदसौर का कुछ इलाका।
3 दिन बारिश की संभावना नहीं, 20 को हो सकती है
मौसम विभाग भोपाल के मौसम वैज्ञानिक वीएस यादव ने बताया कि 19 जुलाई तक तो जिले का मौसम शुष्क (ड्राई) रहेगा।
20 जुलाई से बारिश की अनुकूल संभावना बन रही है, हालांकि तेज बारिश के आसार फिलहाल नहीं दिखाई दे रहे हैं।
बैठक लेकर किसानों को कर रहे जागरूक
कृषि विभाग के उप संचालक भगवान सिंह अर्गल ने बताया कि भारत सरकार द्वारा जिले को अलनीनो से प्रभावित क्षेत्रों में शामिल किया गया है।
अल्प वर्षा की आशंका को देखते हुए हम किसानों से निरंतर फसल बीमा कराने की गुजारिश कर रहे हैं ताकि यदि बारिश कम भी हो तो किसानों को इसका क्लेम मिल सके और नुकसान की भरपाई हो सके।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत आवेदन की आखिरी तारीख 31 जुलाई है, इसलिए अंतिम तिथि से पहले किसान अपनी खरीफ फसलों का बीमा अनिवार्य रूप से करवा लें। इसके लिए हम लगातार बैठकें लेकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं।
कृषि वैज्ञानिक दे रहे हैं सिंचाई की समझाइश
कृषि वैज्ञानिक किसानों को जीवन रक्षक सिंचाई करने की सलाह दे रहे हैं। इसमें फव्वारा पद्धति से सिंचाई करने और बारिश के पानी को सहेजने के लिए कहा जा रहा है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर इस पानी का उपयोग हो सके।
कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सर्वेश त्रिपाठी ने बताया कि इस बार अलनीनो के कारण सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई जा रही है।
फसलों के बीच नियमित डोरा चलाकर खरपतवार नष्ट करने की सलाह किसानों को दी जा रही है।
यह है अलनीनो
अलनीनो एक मौसमी परिघटना है, जो प्रशांत महासागर में समुद्र के सतही तापमान में होने वाले असंतुलन के कारण पैदा होती है।
जब प्रशांत महासागर में अलनीनो सक्रिय होता है तो वह भारतीय उपमहाद्वीप की तरफ आने वाली मानसूनी हवाओं को अपनी ओर खींच लेता है।
इससे मानसून की रफ्तार थमी रह जाती है और देश के कई हिस्सों में कम बारिश या सूखे के हालात बनते हैं।
