बड़वानी के नागलवाड़ी में निर्णय
मप्र की पहली एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति घोषित
- मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना को 200 करोड़ रुपए मिलेंगे
- 3000 करोड़ का निवेश आएगा
- 1 लाख केज स्थापित करने का लक्ष्य, 20 हजार को मिलेगा रोजगार
रंग पर्व से पहले मोहन सरकार ने किसानों को 25,678 करोड़ की सौगात दी है। राशि खेती-किसानी समेत कृषि, पशुपालन क्षेत्र से जुड़े प्रत्येक क्षेत्र में दी है।
मछुआरों व मत्स्य उद्योग से जुड़े लोगों के लिए एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति को मंजूरी दी है। 3 साल में 3000 करोड़ का निवेश होगा।
1 लाख केज स्थापित होंगे। 20 हजार लोगों के लिए रोजगार के अवसर खुलेंगे। नीति को जमीन पर उतारने 18.50 करोड़ मंजूर किए।
मछुआ समृद्धि योजना को 200 करोड़ मिले हैं। सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सोमवार को बड़वानी के नागलवाड़ी स्थित आदिवासियों के आराध्य भिलटदेव के आंगन में कृषि कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिए गए।
पांच विभागों की 14 योजनाओं को दी राशि
पहली कृषि कैबिनेट बैठक में सरकार ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास समेत पांच विभागों की 14 योजनाओं के लिए राशि देने संबंधी निर्णय लिए। लगभग सभी योजनाओं की अवधि का 3 से 5 साल तक विस्तार भी किया।
बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास के 1, उद्यानिकी के 3, पशुपालन के 4, मछुआ कल्याण के 2 व सहकारिता के 4 को मंजूरी दी।
कृषि क्षेत्र में किसके लिए कितने रुपए मंजूर
- 610.51 करोड़ पशु चिकित्सालय व अन्य भवनों के निर्माण पर खर्च होंगे।
- 200 करोड़ मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के तहत बीज संवर्धन, प्रशिक्षण, ब्याज अनुदान पर खर्च किए जाएंगे।
- 1150 करोड़ राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन के तहत 5 वर्ष तक कृषि क्षेत्र में दक्षता बढ़ोतरी पर।
- 1375 करोड़ सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के तहत सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करणों उद्योगों के उन्नयन करने, नई इकाईयों की स्थापना करने, वित्तीय व तकनीकी सहायता देने पर खर्च होंगे।
- 1738.94 करोड़ उद्यानिकी पौधशाला उन्नयन के तहत रोपणियों के विस्तार, अच्छी गुणवत्ता के पौधे तैयार करने पर खर्च होंगे।
- 3502.481 करोड़ कृषि से जुड़ी 20 योजनाओं पर 5 साल में खर्च किए जाएंगे।
