कृषि विभाग ने जारी की एडवायजरी; नुकसान से बचने के लिए किसान नोट करें ये बातें

मौसम की अनिश्चितता के बीच कृषि विभाग ने खरीफ फसलों की बुआई को लेकर जरूरी एडवायजरी जारी की है।

जानें खेतों में कितनी नमी होने पर करें सोयाबीन और धान की बुआई और नुकसान से बचने के अचूक वैज्ञानिक उपाय।

मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए किसान भाइयों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। खरीफ सीजन की फसलों से बंपर पैदावार और स्थिरता बनाए रखने के लिए कृषक कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, मध्य प्रदेश ने कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर एक महत्वपूर्ण एडवायजरी जारी की है।

एमपी के कृषि संचालक उमाशंकर भार्गव ने मैदानी अमले को निर्देश दिए हैं कि वे किसानों से लगातार संपर्क में रहें।

विभाग के अनुसार, कुछ जिलों में कम बारिश को देखते हुए खरीफ फसलों की बुआई में जल्दबाजी करना नुकसानदेह साबित हो सकता है।

 

कब करें खरीफ फसलों की बुआई? ये है आदर्श स्थिति

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, जब तक खेतों में पर्याप्त नमी न हो जाए, तब तक बुआई करना जोखिम भरा हो सकता है।

  • नमी का पैमाना: सामान्य रूप से 4 इंच (यानि लगभग 1 बालिश्त) की गहराई तक मिट्टी में नमी होने और ‘बतर’ आने के बाद ही बुआई की आदर्श स्थिति मानी जाती है।
  • फिलहाल मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं है, इसलिए जिन क्षेत्रों में बारिश कम हुई है, वहां के किसानों को थोड़ा इंतजार करना चाहिए।

 

सिंचाई की सुविधा है तो पहले करें ये काम

जिन किसान भाइयों के पास सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध हैं, उन्हें इस समय का उपयोग मिट्टी की उपजाऊ क्षमता (Soil Fertility) बढ़ाने के लिए करना चाहिए:

  1. हरित खाद (Green Manure): खेत में ढैंचा या सनई की बुवाई करें। जिन क्षेत्रों में पहले बारिश हो चुकी है, वहां भी ग्रीन मैन्योरिंग के लिए ये फसलें बोई जा सकती हैं।
  2. खेत तैयार करते समय डालें ये खाद: बुवाई के लिए तैयार खेतों में गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, सुपर फॉस्फेट, म्यूरेट ऑफ पोटास, जिंक सल्फेट और जिप्सम को अच्छी तरह मिला लें। इनका उपयोग स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सिफारिश और मिट्टी परीक्षण के आधार पर करना बेहतर रहेगा।

 

सोयाबीन और धान की खेती के लिए वैज्ञानिक सलाह

  • अंकुरण परीक्षण: बुवाई से पहले सोयाबीन के बीजों का अंकुरण टेस्ट जरूर करें। केवल 70 प्रतिशत से अधिक अंकुरण क्षमता वाले बीजों का ही उपयोग करें।
  • किस्मों का चयन: कम पानी की मांग वाली और रोग-कीट प्रतिरोधी किस्मों को प्राथमिकता दें।
  • बीजोपचार (Seed Treatment): बुवाई से पहले बीजों को फफूंदनाशक (Fungicide) और जैव उर्वरकों से उपचारित करना अनिवार्य है।
  • आधुनिक तकनीक: सूखे और जलभराव के नुकसान से बचने के लिए रिज-एंड-फरो सीड ड्रिलब्रॉड बेड एंड फरो (BBF) सीड ड्रिल या हस्तचालित सीड डिब्लर का प्रयोग करें।
  • धान उत्पादक किसानों को सलाह दी गई है कि वे पारंपरिक तरीकों के बजाय श्री पद्धति (SRI Method) या धान की सीधी बुआई (DSR) अपनाएं, जिससे पानी और लागत दोनों की बचत होती है।

 

जोखिम कम करने के लिए अपनाएं ‘इंटर क्रॉपिंग’

मौसम के जोखिम से बचने के लिए कृषि विभाग ने इंटर क्रॉपिंग (अंतरवर्ती खेती) की सलाह दी है।

एक ही खेत में एक से अधिक फसलें या एक ही फसल की एक से अधिक किस्मों को मिलाकर बोने से फसल खराब होने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

इसके साथ ही, विभाग ने सभी किसानों को अपनी फसलों का फसल बीमा कराने की भी पुरजोर सिफारिश की है।

 

जल संचय पर दें विशेष ध्यान:

आने वाले समय में पानी की कमी न हो, इसके लिए किसान भाई वर्षा जल संचय (Rainwater Harvesting) के उपाय करें।

खेत तालाबों, पोखर, सोक्ता पिट और कुओं में पानी रोकने का प्रबंध करें। जलभराव वाले हिस्सों से कुओं और नलकूपों (Tube wells) को रिचार्ज करना भविष्य के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।

किसान भाइयों को सलाह दी जाती है कि वे मौसम विभाग के पूर्वानुमानों और स्थानीय कृषि अधिकारियों के संपर्क में रहें और मौसम के अनुकूल ही कृषि कार्य करें।

 

किसानों के लिए मुख्य बातें (Key Points)
  • खेत में 4 इंच तक नमी होने के बाद ही बुआई करें।
  • सोयाबीन का अंकुरण परीक्षण अवश्य करें।
  • बीजों का फफूंदनाशक और जैव उर्वरकों से उपचार करें।
  • धान में SRI या सीधी बुआई जैसी तकनीक अपनाएं।
  • वर्षा जल संचयन और इंटरक्रॉपिंग को प्राथमिकता दें।
  • मौसम अपडेट के अनुसार कृषि कार्य करें और फसल बीमा जरूर करवाएं।