मध्य प्रदेश में मानसून की सुस्ती से बारिश का संकट गहराता जा रहा है। 39 जिले सामान्य से कम बारिश झेल रहे हैं और पूरे प्रदेश में वर्षा का आंकड़ा 17 प्रतिशत नीचे चल रहा है।
अब किसानों और आम लोगों की नजर जुलाई के आखिरी सप्ताह पर टिकी है। आज कई जिलों में अलर्ट बारिश का अलर्ट है।
मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से बारिश का संकट गहराने लगा है। प्रदेश में अब तक सामान्य से 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।
पिछले 13 दिनों से कहीं भी व्यापक और लगातार भारी बारिश नहीं हुई, जिससे अधिकांश जिलों में बारिश का आंकड़ा लगातार नीचे जा रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार अब लोगों की उम्मीद जुलाई के आखिरी सप्ताह में बनने वाले नए मजबूत मौसम तंत्र पर टिकी है।
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अब तक 268.1 मिमी (10.5 इंच) बारिश हुई है, जबकि इस समय तक 323.2 मिमी (12.7 इंच) पानी गिरना चाहिए था।
प्रदेश के 39 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। सबसे अधिक असर पूर्वी मध्य प्रदेश में दिखाई दे रहा है, जबकि पश्चिमी हिस्से में भी बारिश का संतुलन बिगड़ने लगा है।
आज इन जिलों में बारिश की संभावना
मंगलवार को मुरैना, भिंड, दमोह और कटनी में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
वहीं भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम, सागर समेत अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
नीमच, मंदसौर और रतलाम में मौसम साफ रहने की संभावना है।
आखिरी सप्ताह में बदल सकता है मौसम
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई के आखिरी सप्ताह में एक मजबूत मानसूनी तंत्र सक्रिय होने की संभावना है।
यदि यह तंत्र प्रभावी रहा तो प्रदेश में लगातार अच्छी बारिश हो सकती है और बारिश की कमी काफी हद तक पूरी होने की उम्मीद है।
भारी बारिश थमने से बढ़ी चिंता
जुलाई के शुरुआती दिनों में हुई अच्छी बारिश से स्थिति संभलती दिख रही थी, लेकिन पिछले करीब दो सप्ताह से तेज बारिश का दौर थम गया।
कई जिलों में केवल हल्की बूंदाबांदी हुई, जिससे बारिश की कमी पूरी नहीं हो सकी। खेतों में नमी घटने लगी है और कई इलाकों में सिंचाई की जरूरत बढ़ रही है। बारिश कम रहने से बिजली की मांग में भी इजाफा हुआ है।
