बीजामृत क्या है? कैसे घर पर तैयार करें प्राकृतिक बीज उपचार घोल बीजामृत

जानें बीजामृत बनाने की पूरी विधि, आवश्यक सामग्री, बीज उपचार का सही तरीका, फायदे और प्राकृतिक खेती में इसका महत्व। गोबर, गौमूत्र, चूना और मिट्टी से घर पर आसानी से तैयार करें बीजामृत।

आज के समय में खेती की लागत को कम करने और फसलों को रोगों से बचाने के लिए प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को सबसे उत्तम माना जा रहा है।

प्राकृतिक खेती का सबसे पहला और महत्वपूर्ण चरण है—बीज संस्कार यानी बीज उपचार

रासायनिक दवाओं के महंगे और हानिकारक विकल्पों को छोड़कर, किसान भाई घर पर ही बेहद कम लागत में बीजामृत (Bijamrit) तैयार कर सकते हैं।

बीजामृत बीजों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, जो उन्हें फफूंद (Fungus), कीट और मिट्टी से जनित कई तरह की बीमारियों से बचाता है।

आइए जानते हैं इसे बनाने की पूरी वैज्ञानिक और सरल विधि।

 

बीजामृत क्या है और यह कैसे काम करता है?

बीजामृत प्राकृतिक खेती में बीजों के उपचार (Seed Treatment) के लिए उपयोग किया जाने वाला जैविक घोल है। यह पूरी तरह से प्राकृतिक और किफायती है।

इससे उपचारित बीजों की अंकुरण क्षमता (Germination Power) बढ़ जाती है, जड़ें तेजी से फैलती हैं और फसल की शुरुआती अवस्था में ही पौधे बेहद स्वस्थ और मजबूत बनते हैं।

 

बीजामृत बनाने के लिए आवश्यक सामग्री (प्रति एकड़ हेतु)

जीवामृत की ही तरह बीजामृत बनाने के लिए भी आपको किसी बाजारू केमिकल की जरूरत नहीं पड़ती। इसके लिए निम्नलिखित घरेलू सामग्री की आवश्यकता होती है:

  • देसी गाय का ताजा गोबर: 5 किलोग्राम
  • देसी गाय का गोमूत्र: 5 लीटर
  • बुझा हुआ चूना या कली: 250 ग्राम
  • साफ पानी: 20 लीटर
  • सजीव/उपजाऊ मिट्टी: एक मुट्ठी भर (अपने ही खेत की या किसी बरगद/पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी)
  • हींग (वैकल्पिक): 10 ग्राम

 

बीजामृत बनाने की आसान प्रक्रिया

बीजामृत तैयार करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें:

Beejamrit preparation steps by step guide

  1. गोबर का अर्क निकालें: सबसे पहले 5 किलो गोबर को एक सूती कपड़े की पोटली में बांध लें। इस पोटली को रस्सी की मदद से पानी से भरे बर्तन में 10 से 12 घंटे के लिए लटका कर छोड़ दें। इसके बाद पोटली को पानी में 3-4 बार अच्छी तरह निचोड़ लें ताकि गोबर का सारा अर्क पानी में आ जाए।
  2. मिट्टी और चूने का घोल: चूने और एक मुट्ठी उपजाऊ मिट्टी को अलग-अलग बर्तनों में पानी के साथ अच्छी तरह घोल लें।
  3. सभी को एक साथ मिलाएं: अब गोबर के निचोड़े हुए पानी में चूने का पानी, मिट्टी का घोल और 5 लीटर गोमूत्र डालकर अच्छी तरह लकड़ी से हिलाएं। (इच्छा हो तो इसी समय 10 ग्राम हींग भी मिला सकते हैं)।
  4. रात भर रखें: इस पूरे मिश्रण को एक प्लास्टिक के ड्रम या बाल्टी में डालकर, उसके मुंह को सूती कपड़े से बांध दें। इसे 24 घंटे के लिए किसी छायादार स्थान पर रख दें।
  5. दिन में दो बार हिलाएं: इन 24 घंटों के दौरान दिन में कम से कम दो बार घोल को लकड़ी के डंडे की मदद से अच्छी तरह गोल घुमाकर हिलाएं। अगले दिन आपका चमत्कारी ‘बीजामृत’ बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगा।

 

बीजामृत से बीज उपचार कैसे करें?

  • तैयार बीजामृत को बीजों के ढेर पर धीरे-धीरे छिड़कें।
  • हल्के हाथों से बीजों को मिलाएं ताकि हर बीज पर बीजामृत की एक हल्की परत चढ़ जाए।
  • ध्यान दें: जिन बीजों के छिलके बहुत नरम या पतले होते हैं, वहां बहुत सावधानी से हल्के हाथों से लेप लगाएं, ताकि बीज टूटने न पाएं।
  • उपचारित करने के बाद बीजों को धूप में बिल्कुल न सुखाएं। इन्हें छायादार स्थान पर सुखाएं और सूखने के तुरंत बाद बुआई कर दें।

 

बीजामृत के बेमिसाल फायदे
  • जल्दी और अधिक अंकुरण: इसके इस्तेमाल से बीज जल्दी अंकुरित होते हैं और खेत में पौधों का घनत्व अच्छा रहता है।
  • मजबूत जड़ें: बीजामृत पौधों की जड़ों का तेजी से विकास करता है, जिससे पौधे मिट्टी से पोषक तत्व आसानी से खींच पाते हैं।
  • रोगों से सुरक्षा: भूमि और बीज जनित बीमारियां (जैसे जड़ गलन, फंगस) पौधों को छू भी नहीं पातीं।
  • शून्य लागत: बाजार के महंगे कवकनाशी (Fungicides) का खर्च पूरी तरह बच जाता है।

सावधानी की बात: बीजामृत बनाने के लिए हमेशा मिट्टी या प्लास्टिक के बर्तनों का ही चुनाव करें।

लोहे या एल्युमिनियम जैसे धातु के बर्तनों का उपयोग करने से बचें, क्योंकि यह घोल की जैविक गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।

 

प्राकृतिक खेती में क्यों है बीजामृत का विशेष महत्व?

प्राकृतिक खेती का उद्देश्य खेती की लागत कम करना, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना और रासायनिक खेती पर निर्भरता घटाना है।

बीजामृत इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीक है, क्योंकि यह बिना महंगे रसायनों के बीजों को स्वस्थ बनाकर बेहतर उत्पादन की मजबूत शुरुआत करता है।

जो किसान प्राकृतिक खेती अपनाना चाहते हैं, उनके लिए बुआई से पहले बीजामृत द्वारा बीज उपचार करना एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।