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अगले तीन दिन वैज्ञानिकों की इन सलाह पर ध्यान दें किसान

 

वरना हो सकता है नुकसान

 

कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि देर से बोई गई सरसों की फसल में किसान विरलीकरण तथा खरपतवार नियंत्रण का कार्य करें.

सफेद रतुआ रोग की नियमित रूप से निगरानी करें.

 

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्था पूसा के कृषि वैज्ञानिकों ने अगले तीन दिन यानी 22 दिसंबर तक के लिए किसान भाई-बहनों को कुछ सलाह दी है.

कृषि भौतिकी संभाग के कृषि वैज्ञानिकों ने कहा है कि हवा में अधिक नमी के कारण आलू तथा टमाटर में झुलसा रोग आने की संभावना है. इसलिए फसल की नियमित रूप से निगरानी करें.

लक्षण दिखाई देने पर कार्बंडिजम 1.0 ग्राम प्रति लीटर पानी या डाईथेन-एम-45 को 2.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें.

 

तापमान को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह है कि वे पछेती गेहूं की बुवाई अतिशीघ्र कर दें.

बुवाई से पूर्व बीजों को थायरम @ 2.0 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें.

जिन खेतों में दीमक का प्रकोप हो उनमें किसान क्लोरपाईरिफास (20 ईसी) @ 5.0 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से पलेवा के साथ या सूखे खेत में छिड़क दें.

नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा पोटाश उर्वरकों की मात्रा 80, 40 व 40 किग्रा प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए.

 

सरसों की फसल में करें यह काम

कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि देर से बोई गई सरसों की फसल में किसान विरलीकरण तथा खरपतवार नियंत्रण का कार्य करें.

औसत तापमान में कमी को नजर में रखते हुए सरसों की फसल में सफेद रतुआ रोग की नियमित रूप से निगरानी करें.

इस मौसम में तैयार खेतों में प्याज की रोपाई से पहले अच्छी तरह से तैयार गोबर की खाद तथा पोटास उर्वरक का प्रयोग अवश्य करें.

 

पत्ती खाने वाले कीटों की करें निगरानी

आलू की फसल में उर्वरक की मात्रा डालें तथा फसल में मिट्टी चढ़ाने का कार्य करें.

जिन किसानों की टमाटर, फूलगोभी, बन्दगोभी और ब्रोकली की पौधशाला तैयार है, वह मौसम को ध्यान में रखते हुये पौधों की रोपाई कर सकते हैं.

गोभीवर्गीय सब्जियों में पत्ती खाने वाले कीटों की निरंतर निगरानी करते रहें.

यदि संख्या अधिक हो तो बीटी@ 1.0 ग्राम प्रति लीटर पानी या स्पेनोसेड दवा @ 1.0 एमएल/3 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें.

 

खरपतवारों को नष्ट करें

इस मौसम में किसान सब्जियों की निराई-गुड़ाई करके खरपतवारों को नष्ट करें.

सब्जियों की फसल में सिंचाई करें तथा उसके बाद उर्वरकों का बुरकाव करें.

इस मौसम में मिलीबग के बच्चे जमीन से निकलकर आम के तनों पर चढ़ेंगे, इसको रोकने के लिए किसान जमीन से 5 मीटर की ऊंचाई पर आम के तने के चारों तरफ 25 से 30 से.मी. चौड़ी अल्काथीन की पट्टी लपेटें.

तने के आस-पास की मिट्टी की खुदाई करें जिससे उनके अंडे नष्ट हो जाएंगे.

 

आर्द्रता के अधिक रहने की संभावना को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह है कि वे अपनी गेंदे की फसल में पुष्प सड़न रोग के आक्रमण की निगरानी करते रहें.

यह सलाह कृषि वैज्ञानिक डॉ. अनन्ता वशिष्ठ, डॉ. कृष्णन, डॉ. देब कुमार दास, डॉ. बीएस तोमर, डॉ. जेपीएस डबास, डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. पी. सिन्हा एवं डॉ. सचिन सुरेश सुरोशे ने दी है.

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