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सिंचाई रकबा 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाएंगे : मुख्यमंत्री

 

प्रदेश की 50 नई सिंचाई योजनाओं का हुआ वर्चुअल लोकार्पण

 

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि नए कृषि कानून किसानों की आर्थिक उन्नति में उपयोगी होंगे। मध्यप्रदेश में किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) अनुबंध मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम 2020 का प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है। मंडी के अलावा फसल को बेचने के वैकल्पिक उपायों का लाभ किसानों को मिलेगा।

 

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश के सिंचाई रकबे में निरंतर वृद्धि की जाएगी। यह राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भगवान के बाद मेरे लिए किसान है। वो धरती पर अन्न उगाता है। खून-पसीना एक करता है। हमारी व्यवस्था का केन्द्र बिन्दु है किसान। सिंचाई साधनों का विस्तार धरती पुत्र किसानों के लिए वरदान होता है।

 

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प्रदेश के सिंचाई रकबे को 65 लाख तक पहुंचाया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान मिंटो हॉल में सिंचाई योजनाओं के वर्चुअल लोकार्पण और भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

 

भरपूर गेहूँ उत्पादन से मिली कोरोना काल में राहत

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में निर्मित सिंचाई क्षमता का भरपूर उपयोग किया जा रहा है। इस वर्ष गेहूँ उत्पादन उपार्जन में मध्यप्रदेश ने पंजाब को पीछे छोड़ दिया। कोरोना काल में कम से कम अन्न का कोई संकट नहीं रहा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई रकबा सिर्फ सात-आठ लाख हेक्टेयर हुआ करता था जिसे बढ़ाकर हम चालीस लाख हेक्टेयर के आगे ले गए। अब 65 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य है। एक-एक इंच कृषि भूमि सिंचित होगी।

 

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आने वाले एक वर्ष में 30 हजार करोड़ रूपए की योजनाएं मंजूर की जाएंगी। नर्मदा जल का पूरा उपयोग किया जाएगा। तीन वर्ष में नर्मदा योजनाओं के क्रियान्वयन को भी पूर्ण किया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी की पहल पर किसान रेल चल रही है।

 

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किसानों को उत्पादन का सही मूल्य मिले इसके लिए निरंतर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। प्रदेश में 27 वृहद, 47 मध्यम और 287 लघु सिंचाई परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। इनकी लागत 60 हजार 737 करोड़ है। इन सभी की सिंचाई क्षमता 24 लाख हेक्टेयर होगी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभ से प्रदेश के किसान पुन: लाभान्वित हो रहे हैं। अब योजना पुन: गति में आएगी, इसके तहत किसान को मिलने वाली 6 हजार रूपए की राशि में 4 हजार का योगदान राज्य सरकार दे रही है।

 

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