ICAR के 98वें स्थापना दिवस पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज, 10 करोड़ किसानों तक ICAR तकनीक पहुंचाने, नकली बीज-कीटनाशकों पर सख्त कानून, डिजिटल नॉलेज प्लेटफॉर्म और 43 नई फसल किस्मों की घोषणा की।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के 98वें स्थापना दिवस पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश की कृषि व्यवस्था को नई दिशा देने वाला व्यापक रोडमैप पेश किया।
उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज, 10 करोड़ किसानों तक ICAR की तकनीक पहुंचाने, नकली बीज एवं कीटनाशकों पर सख्त कानून, डिजिटल नॉलेज प्लेटफॉर्म और हर संस्थान से एक बड़ी कृषि तकनीक (One Institute-One Grand Innovation) विकसित करने जैसे कई महत्वपूर्ण लक्ष्य घोषित किए।
समारोह के दौरान केंद्रीय मंत्री ने वर्षों से संविदा या अस्थायी रूप से काम कर रहे 150 से अधिक कर्मचारियों को पहली बार नियमित नियुक्ति पत्र सौंपे। उन्होंने इसे ICAR परिवार की एक बेहद भावुक और बड़ी उपलब्धि बताया।
उन्होंने कहा कि अब कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि गुणवत्ता, जलवायु अनुकूल खेती, आधुनिक तकनीक और किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के 7 ऐतिहासिक संकल्प
कृषि क्षेत्र की तस्वीर बदलने के लिए केंद्रीय मंत्री ने निम्नलिखित 7 प्रमुख संकल्प और लक्ष्य तय किए हैं:
1. 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज (Climate Smart Village)
ICAR के 100वें स्थापना वर्ष से पहले देश में कम से कम 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज विकसित किए जाएंगे। इन गांवों में इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल और जल–मृदा संरक्षण के व्यावहारिक तरीकों से खेती होगी।
2. “वन इंस्टिट्यूट–वन ग्रांट इनोवेशन“
ICAR के हर संस्थान को अगले दो वर्षों में कम से कम एक ऐसी परिवर्तनकारी तकनीक विकसित करनी होगी, जिसका सीधा और बड़ा असर राष्ट्रीय स्तर पर किसानों के जीवन पर दिखे।
3. 10 करोड़ किसानों तक पहुंचेगी तकनीक
स्थापना के शताब्दी वर्ष तक ICAR की वैज्ञानिक तकनीकों, नवाचारों और आधुनिक कृषि समाधानों को देश के 10 करोड़ किसानों तक पहुँचाने का लक्ष्य तय किया गया है।
4. “मिशन ICAR-100″ और KVK का कायाकल्प
अगले दो वर्ष ‘मिशन ICAR-100′ के रूप में मनाए जाएंगे। इसके तहत देशभर के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) अब सिर्फ ट्रेनिंग सेंटर नहीं बल्कि इनोवेशन हब, स्टार्टअप सपोर्ट सेंटर और क्लाइमेट एडवाइजरी सेंटर के रूप में काम करेंगे।
5. ICAR ओपन डिजिटल नॉलेज प्लेटफॉर्म
किसानों के लिए एक “Open Digital Knowledge Platform” तैयार किया जाएगा। इसके जरिए किसान अपने मोबाइल पर ही मुफ्त वैज्ञानिक सलाह, मौसम की जानकारी और मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट देख सकेंगे।
6. नकली बीज और कीटनाशकों पर सख्त कानून
किसानों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए घटिया व नकली बीज–कीटनाशक बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई के लिए नया कानून लाया जाएगा। साथ ही, वैज्ञानिकों को ऐसी पोर्टेबल तकनीक बनाने को कहा गया है जिससे खेत में ही बीजों की शुद्धता जांची जा सके।
7. 2029 तक ₹10,000 करोड़ का आत्मनिर्भरता लक्ष्य
ICAR को अपनी तकनीकों, वैक्सीन और बीजों के पेटेंट/लाइसेंसिंग के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। साल 2029 तक 10,000 करोड़ रुपये का आंतरिक संसाधन जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। हर KVK एक पखवाड़े में कम से कम 100 गाँवों में जाकर अपनी रिसर्च और तकनीक का बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेगा।
43 नई फसल किस्में और 17 नई तकनीकों का लोकार्पण
इस अवसर पर 43 नई वैराइटीज़ (फसल किस्में), 17 तकनीक/उत्पाद और 14 प्रकाशनों का लोकार्पण हुआ।
पिछले एक वर्ष में ICAR ने रिकॉर्ड 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित की हैं, जिनमें से 94% जलवायु-अनुकूल और 29 बायोफोर्टिफाइड (जैव-सुदृढ़ीकृत) किस्में हैं।
इनमें रोग प्रतिरोधी, जलवायु-अनुकूल, पोषणयुक्त फसल किस्में, पशुधन एवं मत्स्य क्षेत्र की नई वैक्सीन तथा डिजिटल कृषि समाधान शामिल हैं।
गुणवत्ता आधारित कृषि पर रहेगा फोकस
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भविष्य की कृषि होगी –
- गुणवत्ता आधारित उत्पादन
- निर्यात उन्मुख खेती
- जलवायु अनुकूल कृषि
- दलहन एवं तिलहन में आत्मनिर्भरता
- वैज्ञानिक अनुसंधान आधारित खेती
- किसानों तक तेज तकनीकी हस्तांतरण
निष्कर्ष
ICAR के 98वें स्थापना दिवस पर घोषित रोडमैप स्पष्ट संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में भारतीय कृषि में डिजिटल तकनीक, जलवायु-अनुकूल खेती, वैज्ञानिक अनुसंधान और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन पर सबसे अधिक ध्यान रहेगा।
यदि 100 क्लाइमेट स्मार्ट विलेज, 10 करोड़ किसानों तक तकनीक पहुंचाने और नकली बीजों पर सख्त कार्रवाई जैसे लक्ष्य समय पर पूरे होते हैं, तो इससे किसानों की आय बढ़ाने और विकसित भारत 2047 के कृषि विजन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
