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प्राइवेट जॉब छोड़ करने लगे मधुमक्खी पालन, हो रही लाखों में कमाई

 

भारतीय युवाओं का रुझान अब आधुनिक और वैज्ञानिक खेती के साथ-साथ पशुपालन, मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से बढ़ रहा है. यही कारण है कि युवा खेतीबाड़ी के साथ-साथ पशुपालन और मधुमक्खी पालन करके न सिर्फ अच्छी कमाई कर रहे हैं बल्कि अपनी एक अलग पहचान भी कायम कर रहे हैं.मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की मुलताई तहसील के सांवरी गांव के प्रवीण रघुवंशी पिछले दो साल से सफल मधुमक्खी पालन कर रहे हैं. इससे पहले वे कृषि क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में नौकरी करते थे. तो आइये जानते हैं उनसे मधुमक्खी पालन करके कैसे लाखों रुपये की कमाई कर सकते हैं….

 

हार्टिकल्चर में एमएमसी

प्रवीण ने 2012 में हॉर्टिकल्चर (उद्यान विज्ञान) में एमएससी किया है. पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने एग्रीकल्चर सेक्टर की कई बड़ी कंपनियों में काम किया. कुछ साल कई एनजीओ से जुड़कर छात्रों को मोटिवेशनल प्रोग्राम के तहत ट्रेनिंग देने लगे. इस दौरान वे हमेशा सोचते थे उन्हें कुछ अलग करना चाहिए. उनका कहना है कि वे कृषि क्षेत्र में कुछ अलग करना चाहते थे. नतीजतन उन्होंने एक दिन प्राइवेट सेक्टर की नौकरी छोड़कर मधुमक्खी पालन शुरू करने का मन बनाया. अपनी मेहनत और लगन के दम पर आज उन्होंने बी वर्ल्ड इंडिया (https://www.beesworldindia.com ) नाम की खुद की कंपनी खड़ी कर दी है. 

 

10 तरह की शहद का उत्पादन

प्रवीण बताते हैं कि वे 10 प्रकार की शहद का उत्पादन करते हैं. इनमें जंगली फूल हनी, सरसों हनी, यूकेलिप्टस हनी, करंज हनी, नीम हनी, धनिया हनी और जामुन हनी प्रमुख है. जामुन हनी शुगर रोगी के लिए काफी लाभकारी रहती है. इसलिए जामुन हनी की मार्केट में अच्छी मांग रहती है. मधुमक्खी पालन की विधिवत जानकारी के लिए वे ट्रेनिंग प्रोग्राम भी चलाते हैं. उनका कहना है कि शहद उत्पादन से किसान खेती के अलावा अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं.  

 

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यूरोपियन मधुमक्खी का पालन

वे भारतीय मधुमक्खी एपिस सेराना के अलावा यूरोपियन मधुमक्खी की प्रजाति एपिस मेलिफेरा का पालन करते हैं. भारतीय मधुमक्खी के एक बॉक्स से सालभर में 15 से 20 किलोग्राम शहद का उत्पादन होता है. वहीं यूरोपियन प्रजाति से एक बॉक्स से सालभर में 30 से 60 किलो शहद का उत्पादन लिया जा सकता है. मधुमक्खी की यूरोपियन प्रजाति का पालन करके अच्छी कमाई की जा सकती है. 

 

सालभर में 5 बार उत्पादन

उन्होंने बताया कि यूरोपियन प्रजाति की मधुमक्खी के एक बॉक्स से सालभर में 30 से 60 किलो शहद का उत्पादन लिया जा सकता है. प्रवीण का कहना है कि एक बॉक्स में लगभग 25 हजार मधुमक्खियां होती हैं. अक्टूबर से फरवरी महीने में शहद का अच्छा उत्पादन मिलता है. मधुमक्खिों के बॉक्स को उन खेतों के पास रखा जाता है जिसमें सरसों या अन्य फसलों के फूल आ गए हो. मधुमक्खियां परागण करके शहद का उत्पादन करती है. सालभर में एक बॉक्स से 5 बार शहद का उत्पादन ले सकते हैं.

 

मधुमक्खी की देखभाल

मधुमक्खी के एक छत्ते में तीन प्रकार की मधुमक्खियां रहती हैं. पूरे छत्ते में एक रानी मक्खी के अलावा 5 से 10 प्रतित नर और 80 से 90 प्रतिशत वर्कर मक्खियां होती है. प्रवीण का कहना है कि मधुमक्खी के सफल पालन के लिए मधुमक्खियों की विशेष देखभाल करना पड़ती है. इसके लिए बॉक्स के पास में पानी की व्यवस्था होना चाहिए. साथ ही यह देखना पड़ता है कि मधुमक्खियों की किसी कारण से मौत तो नहीं हो रही है. वहीं जब मक्खियां अधिक संख्या में बढ़ जाती है तब इसे एक अलग छत्ते पर शिफ्ट कर दिया जाता है. वहीं मधुमक्खियों को रात के समय नहीं छेड़ना चाहिए इससे वह काट भी सकती है. यदि अच्छे से उनकी परवरिश की जाती है तो वह आपकी दोस्त बन जाती हैं.

 

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कोम्ब हनी उत्पादन से 7 लाख रुपये की सालाना कमाई

उनका कहना है कि उनके पास 50 बॉक्स है. जिन्हें शहद उत्पादन के लिए अलग-अलग जगहों पर रखा जाता है. इसके अलावा उनसे 100 से अधिक आदिवासी अंचल के किसान जुड़े हुए जिनके 2 से 10 बॉक्स दिए गए हैं जो अपने खेतों पर रख देते हैं. सालभर में 1500 किलो से अधिक का शहद उत्पादन हो जाता है. हम शहद को छत्ते के साथ बेच देते हैं. एक छत्ते में ढाई सौ ग्राम शहद का उत्पादन होता है. जो 500 रूपए में बिकता है. वहीं किलो के हिसाब से प्रति किलो कोम्ब हनी से 2000 रूपए मिल जाते हैं.

 

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