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अर्थव्यवस्था को मजबूती देता गोबर

 

निश्चित ही शीर्षक देखकर लग सकता है ये क्या लिखा होगा परंतु आज का सच यही है कि गोबर हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहा है।

 

आज न केवल हमारा देश बल्कि सम्पूर्ण विश्व जैविक खेती की ओर जा रहा है विभिन्न कीटनाशक हमारे पर्यावरण व शरीर पर दुष्प्रभाव डाल रहे हैं ऐसे में गोबर की खाद जैविक खेती का आधार बन रही है।

गोबर का उपयोग केवल खाद तक ही सीमित नहीं है, इस वर्ष चायना के दीपकों के वहिष्कार के दौरान गोबर के दीपक बहुत लोकप्रिय रहे और लोगों को रोजगार भी मिला। मिट्टी एवं सीमेंट के गमलों एवं फ्लावर पॉट की तरह गोबर के पॉट बनाये जाते हंै जिसमें मिट्टी एवं खाद भरकर उसमें पौधे लगाते हैं।

 

इनकी खास बात यह हैं कि इससे पौधों की वृद्धि तेजी से होती है। गाय के गोबर से बनने वाले कंडे का इस्तेमाल पूजा के दौरान अग्नि जलाने के लिए किया जाता है हवन में ज्यादा देर तक अग्नि प्रज्वलित रखने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि ये कम 3 से 4 घंटे तक आसानी से जलते हैं।

 

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गाय के गोबर की बिभूति खासी लोकप्रिय है। मच्छरों को मारने के लिए गोबर से बनी अगरबत्ती काफी प्रसिद्ध हैं ज्यादातर लोग मच्छर भगाने के लिए यही जलाते हैं क्योकि इसके जलने की गंध के कारण मच्छर एवं कीड़े-मकोड़े दूर रहते है।

गोबर से बनी लकड़ी का उपयोग हवन में अग्नि जलाने के लिए तो किया ही जाता है साथ ही अब इसका इस्तेमाल अंतिम संस्कार एवं अन्य कामों में भी किया जाने लगा है जिससे ये गोबर के व्यवसाय के रूप में विकल्प का कार्य कर रही है।

 

खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग द्वारा हाल में ही देश का पहला पेंट बाजार में उतारा है खादी प्राकृतिक पेंट इसे भारतीय मानक ब्यूरो ने प्रमाणित किया है ये कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट जयपुर द्वारा विकसित किया गया है।

इसका मुख्य आधार गाय का गोबर है। ये पेंट ईको फ्रेंडली, नॉन टॉक्सिक, एंटी फंगल व एंटी बैक्टीरियल गुणों से परिपूर्ण होने के साथ ही सस्ता व बदबूरहित भी है।

इसकी कीमत बाजार में उपलब्ध इमल्शन से आधी से भी कम है। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जी ने अनुमान लगाया कि गोबर के उपयोग को देखते हुए लगता है कि किसान अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकेगा।

 

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source : krishakjagat

 

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