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मध्य प्रदेश भेजी गई नैनो यूरिया की पहली खेप

 

किसानों को मिलेगा फायदा

 

IFFCO Nano Urea: देश के 20 अनुसंधान संस्थानों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के जरिए 11,000 से अधिक स्थानों और 94 फसलों पर हुआ है परीक्षण.

 

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने हरी झंडी दिखाकर मध्य प्रदेश के किसानों के लिए नैनो यूरिया की खेप को रवाना किया.

गुजरात के कलोल संयंत्र से 75 टन यूरिया से लदे ट्रक को मध्य प्रदेश के जबलपुर भेजा गया.

दावा है कि नैनो यूरिया के उपयोग से फसल उत्पादकता में सुधार होगा और किसानों की आय बढ़ेगी.

साथ ही किसानों तक पहुंचाने की लागत तथा रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग में कमी आएगी.

 

तोमर ने कहा, “मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि इफको ने मेक इन इंडिया के तहत इस नए उत्पाद को विकसित किया है. इससे हमारे पर्यावरण की स्थिति बेहतर होगी.

नैनो यूरिया फसलों के लिए प्रभावी होने के साथ ही पर्यावरण हितैषी भी है.” इफको के प्रबंध निदेशक डॉ. उदय शंकर अवस्थी ने कहा कि इस उत्पाद के माध्यम से हम आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में अपना योगदान दे रहे हैं.

 

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इसका इस्तेमाल है सुविधाजनक

अवस्थी ने कहा कि फसलों पर प्रभाव की नजर से नैनो यूरिया की आधे लीटर की एक बोतल यूरिया के एक बैग के बराबर है.

इसके छोटे आकार के कारण दुर्गम इलाकों में किसानों द्वारा इसका उपयोग करना सुविधाजनक है.

आईसीएआर के 20 अनुसंधान संस्थानों और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के जरिए 11,000 से अधिक स्थानों और 94 फसलों पर इसका परीक्षण हुआ है.

 

इसके परिणामों में यह देखा गया कि फसलों की उपज के साथ-साथ उनके पोषण की गुणवत्ता बढ़ाने में भी नैनो यूरिया लाभकारी है.

यह जल और पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में भी मदद करता है, जिससे पृथ्वी मनुष्यों और अन्य जीवित प्राणियों के लिए सुरक्षित हो जाता है.

 

इन प्रदेशों में भी भेजी जा चुकी है नैनो यूरिया

इफको ने इससे पहले हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर को नैनो यूरिया की खेप भेजी थी. आधे घंटे के भीतर ही सारा स्टॉक बिक गया था.

कलोल संयंत्र से प्रतिदिन एक ट्रक में 15000 बोतल नैनो यूरिया की आपूर्ति की जा रही है और आने वाले समय में संयंत्र से हर दिन ऐसे 10 ट्रक भेजे जाएंगे.

 

कितना होगा उत्पादन

पहले चरण में वर्ष 2021-22 के दौरान इफको की गुजरात स्थित कलोल इकाई तथा उत्तर प्रदेश की आंवला और फूलपुर इकाई में नैनो यूरिया संयंत्रों का निर्माण चल रहा है.

शुरू में इन संयंत्रों में 500 मि.ली. की नैनो यूरिया की कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता 14 करोड़ बोतल होगी.

कलोल संयंत्र से प्रतिदिन 6750 टन यूरिया का उत्पादन हो रहा है, जिससे सरकार को सब्सिडी के मद में 35,000 करोड़ रुपये की बचत होगी और किसानों को 35000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय.

 

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