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नरवाई जलाने से प्रदूषण और मिट्टी के समाप्त हो रहे पोषक तत्व

 

जमीनें हो रही बंजर, उत्पादन पर पड़ता है असर

 

खेतों में नरवाई को किसान भले ही जलाकर उसकी सफाई का दावा कर रहे हो, लेकिन किसानों का यह कदम न सिर्फ पर्यावरण के लिए गलत है बल्कि वे अपने जमीन के पोषक तत्व को समाप्त करने का भी काम नरवाई जलाकर कर रहे हैं।

पर्यावरण को बचाने तथा जमीनों की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए किसानों को जगरूक होना पड़ेगा।

ज्ञात हो कि इन दिनों किसान खेतो में कटाई के कार्य में लगा हुआ है और कटाई के बाद फसल के बचें हुए अवशेषों को वह जला देता है।

जबकि कानून यह गलत है तो वही जमीनों के हिसाब से किसान नरवाई जालकर उसे खराब कर रहें है।

 

क्या है नियम

नरवाई जलाने वाले किसानों को जिला प्रशासन की तरफ से धारा 144 के तहत कार्रवाई किए जाने का प्रावधान बनाया गया है।

तो वहीं राज्य शासन के निर्देश के तहत जिला प्रशासन द्वारा नरवाई जलाने वाले ऐसे किसानों के खिलाफ 2 से 5 हजार रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है।

 

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नरवाई जलाने से यह होती है हानि

कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि नरवाई जलाने से प्रदूषण तो फैलता ही है। मृदा शक्ति कमजोर हो रही है। बताया जा रहा है कि मिट्टी में सूक्ष्‌म जीवाणु मौजूद रहते हैं।

जिनसे मिट्टी में सांस लेने की शक्ति तैयार होती है तो वहीं ऐसे जीवाणु मिट्टी में खाद के रूप में काम करने के साथ ही उसकी उर्वरा शक्ति को बढ़ाने का काम करते हैं।

नरवाई जलाने से खेतों में मौजूद सूक्ष्म जीवाणु नष्ट हो जाते हैं जिससे खेत की जमीनों में हवा का आदान-प्रदान नहीं हो पाता है तो वहीं जीवाणु से जो खाद तैयार होती थी वह भी नहीं बन पाती है।

यही वजह है कि खेतों की उर्वरा शक्ति समाप्त हो रही और इससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है। नरवाई से उठने वाला धुंआ तथा उससे उड़ने वाले कचरे से पूरा वातावरण प्रभावित होता है।

 

किया जा रहा जागरूक

नरवाई जलाए जाने से होने वाली हानि को लेकर जहां किसानों को जानकारी दी जा रही है वहीं पर्यावरण और जमीनों की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए अब कानूनी तौर पर शासन-प्रशासन सख्ती शुरू कर दिया है।

 

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source : naidunia

 

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