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MP के किसान ने हवन-राख, बरगद-पीपल की जड़ों के फंगस से बनाई खाद

 

पहले साल से ही मिला बेहतर परिणाम

 

जैविक खाद से बढ़ाएं कमाई

जबलपुर के भूपेंद्र कुमार वर्मा ने एग्रीकल्चर की पढ़ाई करने के बाद ऐसी जैविक खाद तैयार की है, जिसके इस्तेमाल से किसान भरपूर फसल ले सकते हैं।

जैविक खेती करने वाले किसानों की सबसे बड़ी शिकायत रहती है कि मिट्‌टी की रंगत आने में 3 से 4 साल लग जाते हैं।

तब तक उत्पादन नाम मात्र का होता है। इस जैविक खाद से किसान पहले साल से ही अच्छी पैदावार ले सकते हैं।

भूपेंद्र खुद पिछले 6 साल से अपने 7 एकड़ के खेत में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

बेहतर रिजल्ट मिलने के बाद उन्होंने इसका व्यवसायिक उत्पादन शुरू किया है।

 

भूपेंद्र ने बताया कि उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) से 2011 में एग्रीकल्चर B.Sc. की पढ़ाई करने के बाद कुछ दिन तक कंसल्टेंसी की नौकरी की।

फिर गाडरवारा (नरसिंहपुर) में अपने पैतृक जमीन में खेती करने चले आए। 2 साल रासायनिक खाद से खेती की।

उपज भी भरपूर हुई, लेकिन मन को तसल्ली नहीं मिली। एग्रीकल्चर का स्टूडेंट होने के नाते जैविक खेती शुरू की।

पहले साल ही उपज कम हुई तो निराशा हुई। इसके बाद जैविक खेती करने वालों से मिलकर उनके अनुभव जाने और फिर अपना उत्पाद तैयार करने में जुट गया।

 

2014-15 से शुरू किया काम

अपने 7 एकड़ के खेत में से आधे में 2014 से जैविक खेती शुरू की। जैविक खाद को पहले साल से उपयोगी बनाने के लिए रिसर्च जारी रही।

साढ़े 3 साल में अब एक फार्मूला तैयार हो गया है। इस जैविक खाद में गो-मूत्र, केंचुआ खाद, बरगद-पीपल की जड़ों का फंगस और स्वाइल बैक्टीरिया को लिया।

इसके अलावा ऑर्गेनिक तरीके से कार्बनिक मेटर बढ़ाने के लिए इसमें हवन की राख का इस्तेमाल किया गया।

हवन में गाय का कंडा, गाय का घी, विशेष औषधीय पदार्थ को मिलाकर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय 7 दिन तक हवन किया जाता है।

फिर इस राख को फिल्टर कर इसमें मिक्स किया जाता है।

 

इस जैविक प्रोडक्ट को NSHC नाम से बेच रहे

इस जैविक प्रोडक्ट को उन्होंने नैनो सोइल हेल्थ कंडीशनर (NSHC) नाम से बाजार में उतारा है।

भूपेंद्र ने दोस्त रिंकेश कुमार जैन और जबलपुर निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर विनीत मिश्रा के साथ मिलकर सिया ऑर्गेनिक प्रा. लि. नाम से अपनी कंपनी बनाई है।

साथ ही ‘चलो बनाएं मिट्‌टी सोना डॉट कॉम’ नाम से वेबसाइट भी बनाई है। वे एकबार में 1000 किलो खाद तैयार करते हैं।

इसे तैयार करने में एक सप्ताह का समय लगता है।

 

रासायनिक खाद के चलते मिट्‌टी से कार्बन समाप्त हो गया

भूपेंद्र के मुताबिक लगातार रासायनिक खाद के उपयोग से खेत से कार्बन समाप्त हो चुका है।

ये उत्पाद मिट्‌टी में ऑर्गेनिक कार्बनिक मेटर की पूर्ति कर उसे एक्टिव कर देता है।

इसमें न्यूट्रीशियन और माइक्रो कंटेंट के तौर पर हवन की राख का प्रयोग करते हैं।

अपने साढ़े तीन एकड़ खेत में इसी जैविक खाद का प्रयोग कर सब्जी, लहसुन, प्याज, पपीता, धनिया, गेहूं उगा रहे हैं।

अपने इस इनोवेशन को जबलपुर इन्क्यूवेशन सेंटर में मैनेजर अग्रांशु द्विवेदी के मार्गदर्शन में आगे बढ़ा रहे हैं।

 

इस्तेमाल का तरीका

एक एकड़ खेत में स्प्रे विधि से प्रयोग करने के लिए 300 ग्राम मात्रा लेकर 200 लीटर पानी में घोल कर उपयोग कर सकते हैं।

बुवाई के 20वें, 40वें और 60वें दिन स्प्रे करना होता है। इसके अलावा चाहें ताे बुवाई के समय ही 3 किलो प्रति एकड़ की दर से मिट्‌टी, बालू या गोबर की खाद में मिक्स कर इसे खेत में बिखेर सकते हैं।

यह खेत से डिस्चार्ज कार्बन को एक्टिव कर देता है। दावा है कि इसके उपयोग से पहली फसल से रिजल्ट पाएंगे।

उन्होंने 3 एकड़ के खेत में 5 तरह की धान रोपी थी। प्रति एकड़ 18 क्विंटल की उपज इसके प्रयोग से हुई।

इसका उपयोग करने वाले किसानों का भी वे समूह बना रहे हैं।

उनका जैविक प्रमाणीकरण कराने के बाद उत्पाद का वैल्यू एडिशन कर वे मार्केट में लांच करने की तैयारी में हैं।

जिससे किसान को उनके जैविक उत्पाद की सही कीमत मिल सके।

 

अभी तक 200 किसानों को जोड़ चुके

उनके उत्पाद की मांग पश्चिम बंगाल में तम्बाकू की फसल लेने वाले किसान कर रहे हैं।

इसके अलावा चाय के बगान में भी इसका उपयोग बहुतायत में हो रहा है।

गाडरवारा, छत्तीसगढ़, नागपुर और जबलपुर के पाटन क्षेत्र में 200 किसान इसका उपयोग कर रहे हैं।

अब वह डिस्ट्रीब्यूटर भी बना रहे हैं। उनके प्रोडक्ट की कीमत 2500 रुपए रखी है।

हालांकि अभी वे किसानों को सीधे 1700 रुपए में उपलब्ध करा रहे हैं।

 

25 से 30% तक होता है फायदा

इस उत्पाद को बनाने और बेचने पर लगभग 25 से 30 प्रतिशत का फायदा होता है।

एक सप्ताह में वे 1000 किलो उत्पाद तैयार करते हैं। इससे 333 डिब्बा खाद तैयार होती है।

एक डिब्बे में वे 3 किलो जैविक खाद की पैकिंग करते हैं। ये एक एकड़ के लिए पर्याप्त है।

एक डिब्बे की कीमत 1700 रुपए तय की है। इस तरह 1000 किलो खाद उनकी 5.66 लाख रुपए में बिकती है।

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